Friday, September 18, 2026
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निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र ने लगाई फांसी, 13 मामलों में कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा

19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में हुआ था बरी; कुछ महीने पहले बदली पहचान के साथ हरिद्वार आया था

by Dakshi Sahu Rao
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निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र ने लगाई फांसी, 13 मामलों में कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा

CG Prime News@हरिद्वार. Nithari Case Surendra Koli नोएडा के चर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई। उसका शव भूपतवाला क्षेत्र में लाल माता मंदिर के पास स्थित चाय की दुकान के अंदर फांसी पर लटका मिला। पुलिस की शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है, हालांकि मौत की परिस्थितियों की जांच जारी है। मौके से कोई सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।

चार दिन पहले ही किराए पर ली थी चाय की दुकान

पुलिस के मुताबिक, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। उसने हाल ही में भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान किराए पर ली थी। रिपोर्टों के अनुसार, वह यहां अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और कुछ समय पहले उसने एक कंपनी में काम भी शुरू किया था। चाय की दुकान शुरू किए उसे करीब चार दिन ही हुए थे। शुक्रवार सुबह दुकान में उसका शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

स्थानीय स्तर पर दुकान हटाए जाने और किराए के तौर पर दिए गए एडवांस को लेकर उसकी चिंता की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस ने अभी इसे मौत की वजह के रूप में आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि मौत के कारण और घटनाक्रम की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।


19 साल जेल में रहने के बाद हुआ था बरी

सुरेंद्र कोली का नाम 2006 में सामने आए निठारी कांड से जुड़ा था। नोएडा के निठारी इलाके में बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामलों की जांच के दौरान 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले और आसपास से मानव अवशेष मिले थे। इसके बाद कोली और पंढेर को गिरफ्तार किया गया था।

कोली को निठारी से जुड़े 13 मामलों में दोषी ठहराया गया था और कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों और जांच में गंभीर कमियों पर सवाल उठाए थे। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में उसकी रिहाई बरकरार रखी।

नवंबर 2025 में आखिरी मामले में भी बरी

कोली के खिलाफ अंतिम लंबित मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन साक्ष्यों के आधार पर अंतिम मामले में दोषसिद्धि कायम थी, उन्हीं साक्ष्यों को अन्य मामलों में अविश्वसनीय माना जा चुका था। इसके बाद करीब 19 साल जेल में रहने के बाद उसकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ। शुक्रवार को हुई उसकी मौत के बाद हरिद्वार पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस पोस्टमार्टम और अन्य जांच के आधार पर मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने में जुटी है।

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