दुर्ग. पाटन विकासखंड अंतर्गत ग्राम असोगा की निवासी येश्वरी साहू का जीवन कभी कठिन संघर्षों से भरा हुआ था। पति उमेश साहू के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। दो छोटे बच्चों की परवरिश और घर के खर्च को संभालना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था।
महतारी वंदन योजना से मिला सहारा
इसी कठिन समय में Mahtari Vandan Yojana उनके लिए आशा की किरण बनकर आई। आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से आवेदन करने पर उन्हें हर महीने 1000 रुपये की सहायता राशि मिलने लगी। यह छोटी आर्थिक मदद उनके लिए बड़ा सहारा साबित हुई।
सिलाई मशीन से शुरू किया काम
येश्वरी साहू ने इस राशि को खर्च करने के बजाय समझदारी से उपयोग करने का फैसला किया। उन्होंने इस पैसे से सिलाई मशीन खरीदी और गांव में कपड़े सिलने का काम शुरू कर दिया। धीरे-धीरे गांव के लोगों को उनके काम के बारे में पता चला और उनके पास कपड़े सिलवाने वालों की संख्या बढ़ने लगी।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य का सहारा
सिलाई के काम से होने वाली आय से अब येश्वरी साहू अपने बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च को बेहतर तरीके से संभाल पा रही हैं। आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेहनत कर रही हैं और चाहती हैं कि उनके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर जीवन में सफल बनें।
