दुर्ग. जिले के विकासखंड दुर्ग के ग्राम Thanaud की निवासी नंदनी कुंभकार के लिए मूर्तिकला आज आमदनी का मजबूत जरिया बन गई है। उन्होंने जय कुंभकार स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में सफलता हासिल की है। नंदनी बताती हैं कि पहले कुंभकारी कार्य के लिए उन्हें ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था, जिससे बड़े स्तर पर मूर्ति निर्माण करना संभव नहीं हो पाता था और आमदनी भी सीमित रहती थी।
बिहान से मिला सहयोग
नंदनी को Chhattisgarh State Rural Livelihood Mission Bihan से जुड़े सीआरपी के माध्यम से स्व-सहायता समूह की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर समूह का गठन किया और छोटी-छोटी बचत से आपसी लेन-देन की शुरुआत की। समूह को शुरुआत में 15 हजार रुपये की चक्रिय निधि मिली, इसके बाद आजीविका गतिविधि के लिए 60 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में समूह ने कुल 1.5 लाख रुपये का ऋण लिया, जिसमें से मूर्ति निर्माण के माध्यम से लगभग 1 लाख रुपये का ऋण चुका दिया गया।
मूर्तियां, दीये और खिलौनों की अच्छी मांग
नंदनी अप्रैल से दिसंबर तक मिट्टी की मूर्तियां, दीये, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और बच्चों के खिलौने बनाती हैं। वहीं दिसंबर से मार्च के बीच ऑर्डर के अनुसार सीमेंट की मूर्तियां तैयार करती हैं। गणेश पूजा, नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान बिहान के सहयोग से लगाए गए बाजारों में उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है।
सालाना 9-10 लाख की बिक्री
नंदनी के अनुसार बाजारों में 9 से 10 लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है, जिसमें से लगभग 5 लाख रुपये तक शुद्ध आय प्राप्त होती है। इस आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल की व्यवस्था भी हो पाई है।
लखपति दीदी बनने की ओर कदम
आज नंदनी कुंभकार मूर्तिकला के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और “लखपति दीदी” बनने का सपना साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
