नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच आमतौर पर सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार उल्टा ट्रेंड देखने को मिला है। Iran, United States और Israel के बीच जारी तनाव के बावजूद सोने-चांदी की कीमतों में दबाव बना हुआ है, जिससे निवेशक हैरान हैं।
कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट
हालिया सत्रों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर संघर्ष शुरू होने के बाद से चांदी की कीमतों में लगभग 14,000 रुपये यानी करीब 5% की गिरावट आई है। वहीं सोने की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली है। इस दौरान भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक Nifty 50 और BSE Sensex में भी 5 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई आर्थिक कारण काम कर रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक नकदी बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश बेच रहे हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की कीमतों पर दबाव डाला है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना अन्य देशों के खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे मांग कमजोर पड़ सकती है। साथ ही पिछले सालों में सोने की कीमतों में आई तेज तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली भी गिरावट का एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
लंबी अवधि में सकारात्मक संकेत
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट फिलहाल अल्पकालिक हो सकती है। भू-राजनीतिक तनाव, सीमित सप्लाई और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी जैसे कारक लंबे समय में सोने-चांदी की कीमतों को समर्थन दे सकते हैं। इसलिए कई विश्लेषक मौजूदा गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
