नई दिल्ली। 65-भिलाई नगर विधानसभा निर्वाचन से जुड़ी चुनाव याचिका में विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। अब देवेंद्र यादव को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का सामना करना होगा।

भिलाई नगर चुनाव विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
क्या है पूरा मामला
यह याचिका भिलाई नगर विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे द्वारा दायर की गई थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय ने प्रारंभिक स्तर पर याचिका खारिज करने से इनकार करते हुए इसे विस्तृत सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्य कांत एवं न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ के समक्ष हुई। देवेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा ने दलील दी कि चुनाव शपथपत्र में ‘प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर’ की स्थिति बताना अनिवार्य नहीं था और संपत्ति विवरण में त्रुटि अनजाने में हुई।
पांडेय पक्ष की दलील
प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीएल हंसारिया एवं रविशंकर जंधालिया ने कहा कि यदि प्रत्याशी को किसी आपराधिक प्रकरण में ‘घोषित फरार’ किया गया है, तो यह मतदाताओं के जानने के अधिकार से जुड़ा गंभीर तथ्य है। संपत्ति मूल्यांकन में अंतर और चुनाव अवधि की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी साक्ष्य के आधार पर जांच का विषय हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। परिणामस्वरूप SLP खारिज कर दी गई और हाईकोर्ट में मुकदमे का रास्ता साफ हो गया।
