Wednesday, March 18, 2026
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CM साय ने बिलासपुर में फहराया तिरंगा, बोले-मोर संग चलव गा..मोर संग चलव रे..

वीर संतानों का किया अभिनंदन

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@बिलासपुर. Republic day 2026 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर जिला मुख्यालय में 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। साय बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री हैं। इस दौरान सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस बल को राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक मिलेगा। नक्सलवाद अंतिम चरण में है। मार्च 2026 तक प्रदेश नक्सलमुक्त हो जाएगा। सरेंडर नक्सलियों के पुनर्वास, बस्तर कैफे और नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेज किए जाएंगे।

बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी साल 2001 से लेकर 2003 तक गणतंत्र दिवस पर बिलासपुर में ही राष्ट्रीय ध्वज फहराते रहे हैं। वहीं, डिप्टी सीएम अरुण साव बस्तर, डिप्टी सीएम विजय शर्मा सरगुजा जिला मुख्यालय में झंडा फहराया। जांजगीर चांपा में मंत्री ओपी चौधरी ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। दुर्ग साइंस कॉलेज से प्रभात रैली निकली। रैली में प्राचार्य, स्टाफ के साथ एनसीसी कैडेट्स भी शामिल हुए।

वीर संतानों का किया अभिनंदन

सीएम साय ने बिलासपुर में कहा कि जहाँ तक मेरी नजरें जा रही हैं, हर तरफ तिरंगे की शान दिख रही है। माँ भारती की हर संतान उल्लास से भरी हुई दिखती है। हर नागरिक के हृदय में राष्ट्रप्रेम हिलोरे ले रहा है। हर नागरिक के भीतर राष्ट्र निर्माण के संकल्प की ज्योति जल रही है। माँ भारती के ऐसे वीर संतानों का गणतंत्र दिवस के शुभअवसर पर मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

महान संतों को किया याद

सीएम ने कहा कि आज के दिन हम अपने संविधान निर्माताओं का स्मरण करते हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया हमारा संविधान बाबा गुरु घासीदास जी द्वारा दिये गये मनखे-मनखे एक समान के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। भारतीय परंपरा में तुलसीदास और कबीरदास जैसे महान संतों ने राजव्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सबसे ऊपर रखा था। हमारा संविधान हर नागरिक को इसका अधिकार प्रदान करता है।

रजत जयंती महोत्सव मनाया

अभी हमने राज्य स्थापना का रजत महोत्सव मनाया है। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने हमें छत्तीसगढ़ राज्य की सौगात दी थी। हमने उनके जन्मशताब्दी वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया है। रजत जयंती के मौके पर संविधान के मंदिर हमारे विधानसभा के नये भवन का लोकार्पण यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्पन्न हुआ है।

हमारी लोकतांत्रिक आस्था का प्रतीक यह भवन सही मायने में छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से समृद्ध इस भवन की वास्तुकला में छत्तीसगढ़ की माटी का प्रतिबिम्ब झलकता है।

25 वर्ष पूर्व रायपुर के राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में हमारी विधानसभा का पहला सत्र आयोजित हुआ था। राज्य के साथ ही विधानसभा ने भी अपनी समृद्ध परंपरा की रजत जयंती मनाई है। यहां ऐसी अनेक लोकतांत्रिक परंपराएं स्थापित हुईं

वंदे मातरम गान का स्वर सभी ओर

सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सीतामढ़ी हरचौका तक प्रदेश के हर कोने में लोगों ने वन्दे मातरम् का सस्वर गान किया। माँ भारती की प्रशंसा में लिखे गये हमारे राष्ट्रगीत का यह सम्मान बंकिम दा को सच्ची श्रद्धांजलि है।

यह वर्ष डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का 125 वां जयंती वर्ष भी है। एक राष्ट्र, एक निशान, एक विधान के माध्यम से उन्होंने माँ भारती की अखंडता के लिए बलिदान दिया। जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई तो यह राष्ट्र की ओर से डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि थी।

आत्मगौरव का भाव जगाया

इस बार हमने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती भी मनाई। भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज में आत्मगौरव का भाव जगाया। उन्होंने ब्रिटिश शोषण और औपनिवेशिक कानूनों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया। छत्तीसगढ़ की धरती भी ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध जनजातीय विद्रोहों की गवाह रही है। स्वतंत्रता संग्राम में जंगल सत्याग्रह के माध्यम से जनजातीय नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के आजादी की लड़ाई में किये गये बलिदान की कहानी हम डिजिटल माध्यम से सुना रहे हैं। शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर किया। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है।

माओवाद को जड़ मुक्त करेंगे

माओवादी हिंसा को समाप्त करने का यह बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है। इसी साल के मार्च महीने तक हम माओवाद को इस सुंदर धरती से जड़मुक्त कर देंगे। खुशी की बात यह है कि अनेक लोग जो रास्ता भटक चुके थे, वे अब लोकतंत्र की मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं। उन्होंने हथियार रख दिये और अपने हाथों में बाबा साहेब का संविधान थामा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के देश में यह सबसे सुंदर तस्वीर देखने में आई और इसने संविधान की सत्यमेव जयते की भावना को पुष्ट किया।

आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं चला रही कैफे

कुछ महीनों पहले जब मैं एक कार्यक्रम में भाग लेने जगदलपुर गया था। वहां मैं बस्तर कैफे गया, यहां आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं अब कैफे संभालती हैं। हिंसा की राह छोड़कर लोगों की सेवा की राह में आने से उनके चेहरे पर जो खुशी मैंने देखी, उसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। छत्तीसगढ़ का समाज अपने पुरखों द्वारा दिखाये राह पर चलते हुए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटा हुआ है।

जवानों ने दिया बलिदान

सीएम ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की प्रमुख भूमिका रही है। इसमें हमारे छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों का अनुकरणीय योगदान है। इन्होंने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस बल में कार्यरत समस्त बल को सम्मान स्वरूप राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक प्रदान किए जाने की मैं घोषणा करता हूं।

विकसित छत्तीसगढ़ के लिए बनाये गये अंजोर विजन डाक्यूमेंट के अनुरूप हम लगातार कार्य करते रहेंगे। जनभागीदारी से हम छत्तीसगढ़ महतारी को संवारते रहेंगे। मुझे इस अवसर पर स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया जी की कविता की पंक्तियां याद आ रही हैं…
“सरग ला पृथ्वी मा ला देहूं प्रण अइसन ठाने हव मोर संग चलव रे मोर संग चलव जी मोर संग चलव गा मोर संग चलव रे” मस्तूरिया जी की इन पंक्तियों को साकार करना है और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।

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