CG Prime News@दुर्ग. अंबिकापुर में दुर्ग जिले के दो पुलिसकर्मी शराब के नशे में बेसुध हालत में मिले। ड्यूटी में गए ASI की सर्विस इंसास राइफल भी लावारिस पड़ी थी। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने राइफल को अपने कब्जे में लिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद दुर्ग SSP विजय अग्रवाल ने दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

अंबिकापुर में नशे में बेसुध मिले दुर्ग के 2 पुलिसकर्मी, लावारिस पड़ी थी इंसास राइफल, SSP ने किया सस्पेंड
यह है पूरा मामला
यह मामला सरगुजा जिले के अंबिकापुर कोतवाली थाना क्षेत्र का है। निलंबित पुलिसकर्मियों की पहचान ASI जीवन प्रकाश एक्का और कांस्टेबल ऋषिकांत त्रिपाठी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, दोनों को दुर्ग से एक बंदी को अंबिकापुर सेंट्रल जेल पहुंचाने और पेशी के बाद उसे वापस जेल लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

बताया गया है कि 17 अक्टूबर को दोनों पुलिसकर्मी बंदी को लेकर अंबिकापुर पहुंचे थे। 18 अक्टूबर को बंदी को सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने के बाद दोनों दुर्ग लौटने के लिए प्रतीक्षा बस स्टैंड पहुंचे। इसी दौरान शाम करीब 5:40 बजे दोनों बस स्टैंड के बाहर एक ठेले के पास बेसुध हालत में पड़े मिले।
लावारिस पड़ी थी इंसास राइफल
घटना के दौरान ASI जीवन प्रकाश एक्का की सर्विस इंसास राइफल उनके पास लावारिस हालत में पड़ी थी। मौके पर मौजूद लोगों ने जब दोनों पुलिसकर्मियों को इस स्थिति में देखा, तो अंबिकापुर कोतवाली पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राइफल को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद मामले की जानकारी सरगुजा SSP राजेश अग्रवाल को दी गई। सरगुजा SSP ने तत्काल दुर्ग SSP विजय अग्रवाल को घटना से अवगत कराया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों पुलिसकर्मियों का वीडियो बना लिया। वीडियो में ASI जीवन प्रकाश एक्का पुलिस की वर्दी में दिखाई दे रहे हैं, जबकि कांस्टेबल ऋषिकांत त्रिपाठी सिविल ड्रेस में नजर आ रहे हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
पांच दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग SSP विजय अग्रवाल ने दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के बाद दोनों को रक्षित केंद्र अटैच किया गया है। साथ ही, मामले की विभागीय जांच की जिम्मेदारी रक्षित निरीक्षक को सौंपी गई है। जांच अधिकारी को पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अब विभागीय जांच में घटना की परिस्थितियों और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
