अमेरिकी हमलों से परमाणु ढांचे को नुकसान
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Abbas Araghchi ने पहली बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि हाल में हुए अमेरिकी हमलों में देश के कई परमाणु ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इन ठिकानों पर मौजूद महत्वपूर्ण न्यूक्लियर मटेरियल अब मलबे के नीचे दब गया है और फिलहाल वहां तक पहुंच पाना संभव नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब Iran और United States के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
न्यूक्लियर मटेरियल पर क्या होगा फैसला
विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि तकनीकी रूप से मलबे के नीचे दबे परमाणु सामग्री को निकाला जा सकता है, लेकिन फिलहाल सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में इसे बाहर निकालने का निर्णय लिया जाता है तो यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी में की जाएगी। इसके लिए International Atomic Energy Agency की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
जंग से पहले चल रही थी बातचीत
अराघची ने यह भी बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। उस समय ईरान ने अपने 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम को कम स्तर पर लाने का प्रस्ताव भी रखा था। उनके अनुसार यह एक बड़ा कूटनीतिक समझौता साबित हो सकता था।
युद्धविराम पर ईरान का सख्त रुख
ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसने अमेरिका से किसी भी तरह के युद्धविराम की मांग नहीं की है। अराघची के मुताबिक देश अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
हाल के हफ्तों में Israel और अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए थे। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे पूरे Middle East में तनाव काफी बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश इस स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं।
