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तेलीगुण्डरा की महिलाओं ने मशरूम से बनाई पहचान

बिहान योजना से जुड़कर बटन मशरूम उत्पादन में सफल, अब बनीं मास्टर ट्रेनर

by cgprimenews.com
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दुर्ग के तेलीगुण्डरा गांव की महिलाओं का मशरूम उत्पादन

 दुर्ग. ग्राम तेलीगुण्डरा की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। सखी महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बटन मशरूम उत्पादन शुरू कर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि पूरे इलाके में अपनी अलग पहचान भी बनाई है। यह पहल Chhattisgarh State Rural Livelihood Mission (Bihan) के तहत शुरू हुई, जिसके मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का नया रास्ता मिला।

45 बैग से शुरू हुआ सफर

समूह में कुल 12 महिलाएं शामिल हैं, जो मशरूम उत्पादन का काम कर रही हैं। शुरुआत में उत्पादन के लिए उपयुक्त स्थान नहीं था, लेकिन ग्राम पंचायत के सहयोग से भवन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद महिलाओं ने आधुनिक उपकरणों और बेहतर तकनीक के साथ मशरूम उत्पादन शुरू किया। शुरुआती दौर में 45 बैग से शुरू हुआ उत्पादन आज लगातार बढ़ रहा है।

सालाना 80 हजार तक पहुंची आय

लगातार मेहनत और प्रशिक्षण के कारण समूह को अब करीब 80 हजार रुपये सालाना शुद्ध आय होने लगी है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और गांव में ही रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। समूह को मिली 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि का उपयोग महिलाएं घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी कर रही हैं।

अब बन चुकी हैं मास्टर ट्रेनर

इस समूह की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि जो महिलाएं कभी खुद प्रशिक्षण ले रही थीं, वे अब मास्टर ट्रेनर बन चुकी हैं। आज ये महिलाएं आसपास की अन्य ग्राम पंचायतों के स्व सहायता समूहों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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