Wednesday, February 11, 2026
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CG के बहुचर्चित नान घोटाले की CBI जांच की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा ट्रायल अंतिम चरण में

by Dakshi Sahu Rao
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CG PRIME NEWS

CG Prime News@बिलासपुर.Petition seeking CBI probe into Chhattisgarh Naan scam dismissed छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। नान घोटाले को लेकर जनहित याचिकाओं के साथ ही अपील को हाईकोर्ट ने निराकृत और खारिज कर दिया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू की डिवीजन बेंच में नान घोटाले से जुड़ी 8 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। इनमें से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण सालों से लंबित थीं।

सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने मामलों का निराकरण कर दिया था, इसके बाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई तय की थी। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि मामला अब ट्रायल के अंतिम चरण में है, ऐसे में जांच एजेंसी बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट ने जिन लोगों पर एसीबी ने चालान नहीं किया है, उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आवेदन लगाने की छूट दी है।

170 गवाहों के बयान हो चुके

राज्य सरकार की ओर से दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अतुल झा ने बताया कि ट्रायल कोर्ट में अब तक 224 में से 170 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। अब मामला अंतिम चरण में है। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केवल दो याचिकाकर्ता हमर संगवारी एनजीओ और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ही उपस्थित हुए।

अन्य याचिकाकर्ता या उनके वकील अनुपस्थित रहे, जिसके चलते हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया। वहीं, भाजपा नेता धरमलाल कौशिक की ओर से अधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय उपस्थित हुए, जिन्होंने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है।

यह है नान घोटाला

नान यानी नागरिक आपूर्ति निगम पर आधारित यह घोटाला छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में हुई बड़ी अनियमितताओं से जुड़ा है। राज्य में 2011 की जनगणना के अनुसार 55 लाख परिवार थे, लेकिन 70 लाख राशन कार्ड बनाए गए। करोड़ों रुपह्य के चावल, दाल, नमक और अन्य खाद्य सामग्री की आपूर्ति में व्यापक घोटाला हुआ।

घटिया गुणवत्ता का नमक, जिसमें जांच के दौरान कांच के टुकड़े तक पाए गए, आदिवासी इलाकों में वितरित किया गया। नान के 27 जिला प्रबंधक, क्षेत्रीय अधिकारी और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी इस रैकेट से जुड़े बताए गए। इसके बावजूद एसीबी ने कई जिला प्रबंधकों को अभियुक्त नहीं बनाया, जबकि छापों के दौरान अवैध लेन-देन के प्रमाण मिले थे।

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