Saturday, October 17, 2026
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सूरजपुर के युवा कवि राघवेन्द्र सिंह बरौधी की मौलिक कविता: “हौसलों से लिखूँगा अपना आसमान”

सूरजपुर (छत्तीसगढ़) के कवि राघवेन्द्र सिंह बरौधी की प्रेरणादायक रचना 'हौसलों से लिखूँगा अपना आसमान' CG Prime News पर।

by cgprimenews.com
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हौसलों से लिखूँगा अपना आसमान कविता पोस्टर - CG Prime News

सूरजपुर (छत्तीसगढ़)। सूरजपुर जिले के निवासी राघवेन्द्र सिंह बरौधी की मौलिक एवं प्रेरणादायक कविता “हौसलों से लिखूँगा अपना आसमान” हमारे पाठकों के लिए प्रस्तुत है। यह कविता संघर्ष, निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास का संदेश देती है।

हौसलों से लिखूँगा अपना आसमान

जब दुनिया कहे, “तू कर नहीं सकता,”

अपने विश्वास का दीप कभी बुझने मत देना।


राहों में चाहे काँटों के वन उग आएँ,

अपने कदमों को पथ से हटने मत देना।

अँधेरों से कह दो—मेरा सूरज उगेगा,

मेहनत का हर दीप गगन तक जलेगा।

आज भले छोटी हो मेरी पहचान,

कल मेरा कर्म ही गाएगा मेरी शान।

मैं गिरूँगा, फिर उठना सीखूँगा,

हर ठोकर से नई राहें लिखूँगा।

मंज़िल मिले या दूर रहे आज,

हर दिन खुद को निखारता रहूँगा।

नहीं चाहिए भाग्य का कोई सहारा,

मेरे पसीने से दमकेगा सितारा।

वक़्त की आँखों में आँखें डालकर,

मेहनत से गढ़ूँगा भविष्य हमारा।

मैं मिट्टी हूँ—तो सोना बन जाऊँगा,

मैं बीज हूँ—तो वन बन छा जाऊँगा।

जीवन की राहें चाहे हों दुर्गम,

मेहनत से अपना इतिहास रचाऊँगा।

तूफ़ानों से कह दूँगा—मैं झुकने वाला नहीं,

हार की राख में भी मैं रुकने वाला नहीं।

मेरे सपनों की लौ जब नभ को छू जाएगी,

मेरी जीत की गूँज दिशाओं में गूँज जाएगी।

आज कदम छोटे सही, पर इरादे विराट हैं,

मेरे भीतर जागते अनगिनत प्रभात हैं।

मैं अपनी मेहनत से दुनिया को दिखाऊँगा—

हौसलों से लिखूँगा अपना आसमान।

  • रचनाकार: राघवेन्द्र सिंह बरौधी

  • स्थान: सूरजपुर, छत्तीसगढ़

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