Sunday, July 26, 2026
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राष्ट्र संत आचार्य विद्यासागर महाराज ने ली समाधि, अन्न जल का पूरी तरह त्याग कर माघ शुक्ल अष्टमी को ब्रह्मलीन हो गए

by Dakshi Sahu Rao
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छत्तीसगढ़ में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित

CG Prime News@डोंगरगढ़. जैन मुनि आचार्य श्रीविद्यासागर महाराज ने रविवार की रात 2.30 बजे संल्लेखना पूर्वक समाधि (देह त्याग दी) लेकर ब्रह्मलीन हो गए। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरी तीर्थ पर उन्होंने अंतिम सांस ली है। आचार्य विद्यासागर महाराज अस्वस्थ चल रहे थे। पिछले तीन दिन से अन्न जल का पूरी तरह त्याग कर दिए थे। डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ में उनका अंतिम संस्कार किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने आधे दिन का राजकीय शोक घोषित किया।

आचार्य श्रीविद्यासागर महाराज के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आचार्य श्रीविद्यासागर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अंतिम दर्शन के लिए डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी में बड़ी संख्या में उनके अनुयायियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जानकारी के मुताबिक आचार्यश्री ने पिछले तीन दिन से अन्न जल का पूरी तरह त्याग कर दिया था। अंतिम सांस तक चैतन्य अवस्था में रहे और मंत्रोच्चार करते हुए उन्होंने देह का त्याग किया। समाधि के समय उनके पास पूज्य मुनिश्री योगसागर जी महाराज, समतासागर जी महाराज, प्रसादसागर जी महाराज संघ उपस्थित थे। देश भर के जैन समाज और आचार्यश्री के भक्तों ने उनके सम्मान में रविवार को एक दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला किया है। सूचना मिलते ही आचार्यश्री के हजारों शिष्य डोंगरगढ़ के लिए रवाना हो गए हैं।


पीएम मोदी आचार्य को याद करते हुए हो गए भावुक

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी श्रीश्री १०८ आचार्य विद्यासागर महाराज को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने मंच से महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अभी कुछ माह पूर्व वह सुबह-सुबह उनसे मिलने चंद्रगिरी डोंगरगढ़ गए थे, लेकिन इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे दोबारा आचार्य विद्यासागर महाराज से नहीं मिल पाएंगे। इतना बोलते ही उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि श्री विद्यासागर महाराज इतने जागरुक थे कि उनके कामों पर हमेशा अपनी राय मैसेज के माध्यम से देते रहे। उन्होंने अपने जीवनचर्या से युवा पीढ़ी को सद्मार्ग दिखाया है।

सीएम ने श्रीविद्यासागर महाराज के निधन पर जताया शोक

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज के निधन पर शोक जताया। सीएम साय ने शोक संदेश में लिखा, विश्व वंदनीय, राष्ट्र संत आचार्य श्रीविद्यासागर महामुनिराज जी के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में सल्लेखना पूर्वक समाधि का समाचार प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया को अपने ओजस्वी ज्ञान से पल्लवित करने वाले आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को देश व समाज के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्य, उनके त्याग और तपस्या के लिए युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा। आध्यात्मिक चेतना के पुंज आचार्य श्री विद्यासागर जी के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन।

कर्नाटक में जन्में थे आचार्य विद्यासागर

आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक प्रांत के बेलगांव जिले के सदलगा गांव में हुआ था। 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर नगर में अपने गुरु आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ली थी। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उनकी कठोर तपस्या को देखते हुए अपना आचार्य पद सौंपा था। आचार्यश्री 1975 के आसपास बुंदेलखंड आए थे। वे बुंदेलखंड के जैन समाज की भक्ति और समर्पण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना अधिकांश समय बुंदेलखंड में व्यतीत किया। आचार्यश्री ने लगभग 350 दीक्षाएं दी हैं।

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