Saturday, October 3, 2026
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रायगढ़ में इंटर स्टेट लकड़ी तस्करी सिंडिकेट का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार

खैर और तेंदू की अवैध कटाई के बाद फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट से दूसरे राज्यों में भेजने का आरोप, गोदाम से बड़ी मात्रा में लकड़ी और उपकरण जब्त

by cgprimenews.com
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रायगढ़ में लकड़ी तस्करी मामले में जब्त खैर और तेंदू के लट्ठे

रायगढ़। Inter-state timber smuggling syndicate busted in Raigarh; three accused arrested. जिले में खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की अवैध कटाई और तस्करी से जुड़े एक कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और मध्य प्रदेश तक सक्रिय था। इसके बाद लकड़ियों को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीणों से कटाई कराकर गोदाम में किया जाता था भंडारण

पुलिस जांच के अनुसार धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार क्षेत्र के वन इलाकों से खैर और तेंदू की लकड़ियां कटवाकर रायगढ़ के गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में जमा की जाती थीं। पुलिस का कहना है कि ग्रामीणों को आर्थिक लालच देकर लकड़ी कटाई में इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद लकड़ियों की छिलाई और अन्य प्रक्रिया गोदाम में की जाती थी। आरोप है कि इस पूरे काम में रोहित मित्तल के साथ मनीष अग्रवाल की भूमिका थी। वहीं, लकड़ियों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए वाहन मालिक और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों का इस्तेमाल किया जाता था।

2025 में वन विभाग ने की थी गोदाम में रेड

वन विभाग को मई 2025 में गढ़उमरिया स्थित गोदाम में अवैध लकड़ी भंडारण की सूचना मिली थी। इसके बाद 5 मई 2025 को टीम ने छापा मारा। कार्रवाई के दौरान एक ट्रक में तेंदू प्रजाति के 42 लट्ठे मिले। इनका कुल आयतन करीब 1.731 घन मीटर बताया गया है। इसके अलावा गोदाम से तेंदू और खैर प्रजाति के 146 लट्ठे बरामद हुए। इनका आयतन करीब 6.741 घन मीटर बताया गया। मौके से नौ चट्टा जलाऊ लकड़ी, एक कटर मशीन, वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा भी जब्त किया गया।


फर्जी परमिट की जांच से खुला नेटवर्क

वन विभाग के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान लकड़ी के परिवहन से संबंधित ट्रांसपोर्ट परमिट प्रस्तुत किया गया था। जांच में परमिट पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। इसके बाद दस्तावेज के फर्जी होने की आशंका सामने आई। मामले की विस्तृत जांच के लिए वन विभाग ने 2 सितंबर 2026 को थाना जूटमिल में आवेदन दिया। इसके आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई।

तीन आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश जारी

पुलिस ने आरोपी रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी, भारतीय वन अधिनियम और संगठित अपराध से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। मामले में भरत कुमार मेश्राम को फरार बताया गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। साथ ही लकड़ी की कटाई, परिवहन और दूसरे राज्यों में बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। यह कार्रवाई एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन और वन विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। विशेष टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेज, परिवहन व्यवस्था और आरोपियों की भूमिका की भी जांच की है।

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