Monday, January 5, 2026
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Big Breaking: बिजली कंपनी के कॉल सेंटर में फोन करने पर नहीं मिलेगी सुविधा, मार्च माह से वेतन नहीं मिलने पर ऑपरेटरों ने किया काम ठप्प

by cgprimenews.com
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– दिल्ली नोएडा की सीवाए फ्यूचर ठेका कंपनी संभाल रही सीएसपीडीसीएल का कॉल सेंटर
भिलाई@CG Prime News. छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के दुर्ग सर्किल में 22 अप्रेल से कॉल सेंटर का कामकाज ठप्प हो गया है. कोरोना संक्रमण काल में दो माह से 53 ऑपरेटरों को वेतन नहीं मिला, इससे नाराज होकर उन्होंने विरोध किया. इस गर्मी में बिजली बंद होने से उपभोक्ताओं पर फर्क पड़ेगा. बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण प्रभावित हो सकता है. जब तक ऑपरेटरों की समस्या का निराकरण नहीं हो जाता तब तक बिजली कंपनी कार्य संभाल रही है.

शुक्रवार को सेक्टर-1 स्थित बिजली वितरण कंपनी के दफ्तर के बाहर तीन दर्जन से अधिक ऑपरेटर इकट्टा हुए. दिल्ली की ठेका कंपनी सीवाय फ्यूचर के खिलाफ ऑपरेटरों ने विरोध किया. इससे बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण प्रभावित हो रहा है. ऑपरेटरों ने बताया कि 53 कर्मचारी है, जिनका मार्च माह से वेतन नहीं मिला है. बता दें बिजली वितरण कंपनी के भिलाई – दुर्ग में स्थित सभी सब स्टेशन पर उपभोक्ता से जुड़ी शिकायतों के निराकरण के लिए कॉल सेंटर की स्थापना की गई है. इन सभी कॉल सेंटर का संचालन नोएडा की ठेका कंपनी सी वाय फ्यूचर प्राइवेट लिमिटेड करती है. इस कंपनी ने सामान्य वेतन पर स्थानीय युवाओं को आपरेटर के पद पर तैनात किया है. कोरोना संक्रमण की भयावहता और लॉकडाउन के बावजूद सभी ऑपरेटर तीनों पाली में कॉल सेंटर में अपनी सेवा निरंतर दे रहे हैं. विरोध स्थल पर महेश सेन, रविन्द्र सिंग, लोकेश कुमार, आलोक यादव, नवीन विश्वकर्मा, लोकनाथम, मिथलेश प्रधान, नवीन यादव, प्रवीण सिन्हा, धर्मेंद्र यादव समेत 53 ऑपरेटर शामिल रहे.

दो माह से नहीं मिला वेतन, घर में बीमार सदस्यों का नहीं करा पा रहे उपचार

सामान्य वेतन में निजी कंपनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी में सेवा देने वाले ऑपरेटर का कहना है कि कोरोना काल में सभी के घर में राशन और चिकित्सा संबंधी समस्या बनी हुई है. ऐसे हालातों में मार्च से वेतन नहीं मिल पाने से सभी आपरेटर और उन पर आश्रित परिवार की दिक्कत बढ़ गई है. मौखिक और लिखित रूप से ध्यानाकर्षण कराने पर निजी कंपनी के प्रतिनिधि बिजली कंपनी से पिछले छह महीने का भुगतान नहीं होने का हवाला देकर वेतन दे पाने से इंकार कर रहे हैं. वहीं काम से निकाल देने की धमकी भी दी जा रही. आपरेटरों ने मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कोरोना काल के विपरीत हालातों को देखते हुए उनके वेतन भुगतान के लिए पहल करने का आग्रह किया है.

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