CG Prime News@दिल्ली. No-confidence motion moved against Lok Sabha Speaker Om Birla लोकसभा में विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश कर दिया। इसमें 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। मिली जानकारी के अनुसार विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में 9 मार्च को चर्चा हो सकती है। 13 फरवरी को बजट सत्र के वर्तमान सेशन का आखिरी दिन है। इसके बाद 8 मार्च से सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी। इससे पहले बजट सत्र के 10वें दिन संसद दो बार स्थगित हुई। दोपहर 2 बजे से संसद की कार्यवाही शुरू हो सकी। शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की।
SP, Left, RJD समेत लगभग सभी विपक्षी दल शामिल
लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है। इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, SP, Left, RJD समेत लगभग सभी विपक्षी दल शामिल हैं। हालांकि TMC ने इस नोटिस से दूरी बनाई है। गौर करने वाली बात यह भी है कि इस नोटिस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस देने के लिए कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई,मोहम्मद जावेद लोकसभा महासचिव के पास पहुंचे थे।
क्यों उठाया गया यह कदम?
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज को दबाया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी (PM Modi) की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष द्वारा सौंपे गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार बिंदु उठाए गए हैं-
1. नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया
2. विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया
3. बीजेपी सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों को लेकर आपत्तिजनक बातें बोलने दी गई
4. स्पीकर ने कांग्रेस सांसदों पर साजिश का आरोप लगाया
लोकसभा स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
- लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के कार्यप्रणाली नियमों के अनुच्छेद 200 के तहत संचालित होती है।
- कोई भी सदस्य जो स्पीकर या उप-स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाना चाहता है, उसे लोकसभा महासचिव को लिखित रूप में प्रस्ताव सौंपना पड़ता है।
- इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे आरोपों को स्पष्ट और सटीक शब्दों में लिखा जाना, जिसमें कोई तर्क, अनुमान, व्यंग्य, आरोप या अपमानजनक बातें शामिल न हों।
- नोटिस मिलने के बाद, प्रस्ताव पेश करने की अनुमति के लिए संबंधित सदस्य के नाम पर कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
- प्रस्ताव की चर्चा के लिए तारीख तय की जाती है, जो नोटिस की तिथि से कम से कम 14 दिन बाद होती है।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव को कम से कम 50 सदस्यों (सांसदों) का समर्थन प्राप्त होना चाहिए, अन्यथा यह गिर जाता है।
- आमतौर पर, प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिनों के भीतर बहस और मतदान होता है। जब प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो स्पीकर या उप-स्पीकर अध्यक्षता नहीं कर सकते।
- अंत में, प्रस्ताव को सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित होना जरूरी है।
