Wednesday, February 11, 2026
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हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को बताया गलत, ED को जारी किया नोटिस, दो हफ्ते में मांगा जवाब

by Dakshi Sahu Rao
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CG Prime News@रायपुर. छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला (Chhattisgarh liquor scam) और मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार पूर्व सीएम भूपेश बघेल (former cm bhupesh baghel) के बेटे चैतन्य बघेल (Chaitanya Baghe) की याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट ( Chhattisgarh High Court) में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते बाद यानी 26 अगस्त तक जवाब मांगा है। चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती दी। ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को भिलाई से गिरफ्तार किया था। चैतन्य 24 दिनों से जेल में बंद है। हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद वर्मा की बेंच में चैतन्य बघेल की तरफ से पक्ष रखा गया। याचिका में गिरफ्तारी की प्रक्रिया को गलत बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली थी राहत

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली थी। ईडी के मामलों को लेकर लगाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद चैतन्य बघेल ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि उनकी हिरासत गैरकानूनी है। कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

24 दिनों से जेल में बंद है पूर्व सीएम के बेटे

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को भिलाई से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं।

ईडी के मुताबिक शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया। ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया गया है। साथ ही सिंडिकेट के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है।

पीने का नहीं मिल रहा साफ पानी

याचिकाकर्ता चैतन्य के वकील हर्षवर्धन परगनिहा ने बताया कि चैतन्य को पीने का साफ पानी जेल में नहीं मिल रहा। कोर्ट ने इस संदर्भ में जेल अधीक्षक को जरूरी दिशा निर्देश दिया है। चैतन्य ने खुद को हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था।

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