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पुलिस कस्टडी में युवक की मौत, हाई कोर्ट ने थाना प्रभारी और 3 कांस्टेबल को सुनाई 10 साल कैद की सजा

by Dakshi Sahu Rao
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CG PRIME NEWS

CG Prime News@बिलासपुर. Youth dies in police custody, station in-charge and 3 constables sentenced to 10 years छत्तीसगढ़ में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत मामले में हाईकोर्ट (chhattisgarh high court ) ने थाना प्रभारी और चार पुलिस कांस्टेबल को उम्र कैद की सजा सुनाई है। पूरा मामला जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला थाने का है। जहां पुलिस कस्टडी में युवक की मौत हो गई थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि हिरासत में मौत केवल कानून का उल्लंघन नहीं है। बल्कि, यह लोकतंत्र और मानव अधिकारों पर गहरा आघात है।

जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो यह समाज के लिए गंभीर खतरा है। इस टिप्पणी के साथ ही जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी ने दोषी थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों की उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। साथ ही, कोर्ट ने हिरासत में मौत को गैरइरादतन हत्या का मामला माना है।

यह है पूरा मामला

साल 2016 में ग्राम नरियरा निवासी सतीश नोरगे को शराब पीकर हंगामा करने के आरोप में मुलमुला थाना पुलिस ने हिरासत में लिया था। जिसके कुछ घंटों बाद ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद लोगों ने जमकर हंगामा मचाया और दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग की। विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन के बाद जब शव का पोस्टमार्टम कराया गया, तब रिपोर्ट में युवक के शरीर पर 26 जगह चोट के निशान मिले। लिहाजा, इस मामले में थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह राजपूत, कांस्टेबल सुनील धु्रव, दिलहरण मिरी और सैनिक राजेश कुमार के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया।

बता दें कि थाना प्रभारी सहित सभी आरोपी पुलिसकर्मी साल 2016 से जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर उनकी सजा की गिनती की जाएगी। दस साल में बची हुई सजा उन्हें जेल में काटनी होगी।

हाईकोर्ट ने माना हत्या की मंशा नहीं थी, इसलिए राहत

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए यह पाया कि आरोपियों की हत्या की मंशा स्पष्ट नहीं थी। लेकिन, आरोपी जानते थे कि पीटने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके चलते हाईकोर्ट ने आरोपियों को आंशिक रूप से राहत देते हुए हत्या की सजा को धारा 304 भाग-1 के तहत गैर इरादतन हत्या माना और सजा को उम्र कैद से घटाकर 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है।

स्पेशल कोर्ट ने सुनाई थी उम्र कैद की सजा

पुलिस ने थाना प्रभारी सहित सभी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिसके बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश किया। ट्रायल के बाद स्पेशल कोर्ट एट्रोसिटी ने साल 2019 में सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। साथ ही सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई। जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। वहीं, मृतक की पत्नी ने इसका विरोध करते हुए हस्तक्षेप आवेदन लगाया था।

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