CG Prime News@बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों और टीचर्स के युक्तियुक्तकरण (Rationalization case) का मामला अब बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को 34 शिक्षकों और शिक्षक संघ अध्यक्ष संजय तिवारी ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन कर काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें अपील करने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है। साथ ही, याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर को नोडल अधिकारी बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
तत्काल रोक लगाने की मांग की
शिक्षक संघ के अयक्ष तिवारी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 309 और भर्ती नियम 2019 का हवाला देते हुए कहा कि बिना किसी संशोधन के यह आदेश जारी कर दिया गया है। जो विधिसम्मत नहीं है। याचिका में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
यह है युक्तियुक्तकरण
युक्तियुक्तकरण के तहत जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक है, उन्हें शिक्षक विहीन या कम शिक्षक वाले स्कूल में भेजा जाएगा। जिन स्कूलों में छात्राओं की संख्या कम है, उन छात्रों को नजदीक के स्कूल में मर्ज किया जाएगा। प्रक्रिया शुरू होते ही सरकार के इस फैसले का शिक्षक संघ ने विरोध शुरू कर दिया है।
7 हजार 127 स्कूलों में है सिर्फ एक शिक्षक
छत्तीसगढ़ के 54185 स्कूल में से 297 स्कूल शिक्षकविहीन है और 7 हजार 127 स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक है। इसी असमानता को दूर करने के लिए सरकार ने युक्तियुक्तकरण करने का फैसला लिया है। इसके लिए 10 हजार 463 स्कूल शामिल किए गए हैं।
सरकार के फैसले के विरोध में कांग्रेस
इस पूरे मामले में कांग्रेस भी सरकार के फैसले के विरोध में आ गई है। कांग्रेस का कहना है सरकार शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने में लगी है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि प्रदेश सरकार ने माना था कि 45 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं, लेकिन शिक्षकों की भर्ती से बचने के लिए शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने वाले फैसले के तहत यह सरकार स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कर रही है।

