भाजपा के गलत नीतियों के खिलाफ यह लड़ाई रहेगी जारी
CG Prime News@भिलाई. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव की संपत्ति और बैंक अकाउंट को अटैच कर दिया। ईडी की इस कार्रवाई से विधायक देवेन्द्र यादव ने ईडी पर आरोप लगाते हुए कोर्ट में जाने की बात कही है।
गुरुवार सुबह 9 बजे सेक्टर-5 भिलाई नगर निवास पर विधायक देवेन्द्र यादव ने पत्रवार्ता की। उन्होंने बताया कि ईडी ने मेरी बुजुर्ग मां को समन भेजा है। उन्हें पता होना चाहिए कि मां महज बच्चे की जननी ही नहीं होती, बल्कि परिवार को संभालने का आधार होती है। लेकिन यहां तो ईडी परिवार को संभालने वाली 70 वर्षीय वृद्ध मां और परिवार को विरोधी दल के षणयंत्र का हिस्सा बनकर परेशान करने का कार्य कर रही है। मेरी मां को पहले तो नोटिस जारी किया। अब उनकी पुश्तैनी संपत्ति को अटैच कर सीज करने की कार्रवाई कर रही है। ईडी की इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाउंगा।
संपत्ति अटैच की कार्रवाई पर उठाया सवाल
विधायक ने ईडी द्वारा संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से दुनिया का हर मां-बाप अपने बच्चों के रहने के लिए आश्रय बनाता है। 2011 में मां- पिता ने बैंक से लोन लेकर हाउसिंग बोर्ड से 13 लाख में मकान खरीदा था। पंजाब नेशनल बैंक में किस्त के माध्यम से उसे अदा किया। 2020 में लोन क्लीयर हुआ। जिसका पूरा रिकॉर्ड है।
भिलाई घर और भिलाई की जनता परिवार
विधायक ने पत्रवार्ता के जरिए बताया कि भिलाई मेरा घर और भिलाई जनता मेरा परिवार है। इससे जनता भली भांति वाकिफ है। भाजपा को यह भिलाई की जनता के साथ मेरा पारिवारिक रिश्ता खटक रहा है। इसलिए उन्हें, हमें परेशान करने का टारगेट दिया गया है। जाओ और उन्हें सताओ। छापा मारो, नोटिस जारी कर परेशान करो। ईडी का यही खेला शुरु कर दिया।
परिवार का कर दिया बंटवारा
विधायक ने कहा कि ईडी ने मेरे नाम पर ज्यादा संपत्ति दर्शा कर मुझे बदनाम करने की नीयत से परिवार के पुश्तैनी घर का बंटवारा कर दिया। ईडी ने कुल 19 लाख 81 हजार 210 रुपए सीज किया है। इसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा से मुझे मिलने वाली सैलेरी 8 लाख रुपए है और बाकी 10 लाख घर की कीमत शामिल है। यह मेरी मां और बड़े भैय्या के नाम पर है। उस घर का आधा हिस्सा कर मेरे नाम पर जोड़कर 19 लाख रुपए बनाया है।
राज्य के सिसटम को ठप कर रहे
विधायक ने कहा कि सरकार ने बेहतर प्रदर्शन कर विकास का काम शुरू किया। इस लिए एजेंसियां खेल शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया है कि ईडी अब राज्य में पूरे सिस्टम को ठप करने का काम कर रही है। व्यापारी, अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को समन भेजती है। छापेमारी में कागजातों और नकदी बरामदगी की बातें सामने आती हैं, लेकिन इस संबंध में औपचारिक सूचनाएं जारी नहीं की जाती हैं।

