रायपुर, 13 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी में साइबर ठगी का एक बड़ा प्रयास सामने आया, जिसमें कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला के नाम का दुरुपयोग कर अधिकारियों को झांसा देने की कोशिश की गई। हालांकि, अधिकारियों की सतर्कता के चलते ठग अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाए और समय रहते मामले की शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज करा दी गई। (Cyber fraud attempt in the name of MD fails, officials’ vigilance saves huge amount)
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फर्जी व्हाट्सएप नंबर से बनाया दबाव
जानकारी के अनुसार, कुछ अधिकारियों को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर संदेश भेजे गए। संदेश में खुद को एमडी बताते हुए कहा गया कि वे एक महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल प्रभाव से 49 लाख 60 हजार 801 रुपए आरटीजीएस के माध्यम से एक खाते में ट्रांसफर किए जाएं। मैसेज में बैंक डिटेल, आईएफएससी कोड और लाभार्थी का नाम भी साझा किया गया था। साथ ही, तुरंत कार्रवाई करने का दबाव भी बनाया गया।
सतर्कता से खुली ठगी की पोल
संदेश मिलने के बाद अधिकारियों ने बिना जल्दबाजी किए इसकी पुष्टि करने की कोशिश की। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड है, जिसमें उच्च पदस्थ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया था। प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ईमेल से सतर्क रहें। ऐसे नंबर को तुरंत ब्लॉक करें और जरूरत पड़ने पर 1930 पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही, किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि हमेशा आधिकारिक माध्यम से ही करें।
एमडी ने जारी किया अलर्ट
घटना की जानकारी मिलते ही प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्हाट्सएप या अन्य अनौपचारिक माध्यमों से किसी भी प्रकार का भुगतान निर्देश देना असामान्य और संदिग्ध है। ऐसे मामलों में बिना पुष्टि के कोई वित्तीय लेन-देन न किया जाए।
साइबर ठगों की नई रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी अब मीटिंग में हूं, तुरंत ट्रांसफर करें और गोपनीय रखें जैसे संदेशों का उपयोग कर मानसिक दबाव बनाते हैं, ताकि व्यक्ति बिना सोचे-समझे निर्णय ले। इस तरह के हमले खासतौर पर सरकारी और कॉर्पोरेट संस्थानों को निशाना बनाते हैं।
