Wednesday, February 11, 2026
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100 रुपए में नल कनेक्शन का भ्रमक प्रचार कर गरीबी का मजाक मत उड़ाइए महापौर जी

by cgprimenews.com
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भिलाई@CG Prime News. भिलाई नगर निगम के महापौर आजकल विज्ञापन की तरह झूठ और भ्रामक प्रचार भी करने लगे हैं, अभी तक उपभोक्ताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने कंपनियां सितारों को विज्ञापन में लाती है, ताकि उनके उत्पाद की बिक्री बढ़ जाए। मगर राजनीति में झूठ और भ्रम का व्यापार पहली बार सुन और देख रहे हैं। नल कनेक्शन के नाम पर छूट असलियत में झूठ को किरदारों की तरह विज्ञापित करने में लगे हैं।

नेहरू नगर जोन – 1 के अध्यक्ष भोजराज सिन्हा, पार्षद मनोज यादव, छोटे लाल चौधरी, विनोद चेलक, जोगेन्दर शर्मा, ललित शंकर चौधरी, शिव प्रकाश शिब्बू, दीपक रावना, गायत्री शिवा यादव ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि आजकल हमारे महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव भी विज्ञापन जगत की तरह ही नए किरदार में है। झूठ पर झूठ बोलने वाले बेचारे महापौर के पास जब अपनी युवा सोच के पांच काम भी इस शहर को बताने को नहीं रहा तो भ्रामक प्रचार मेंं लग गए हैं। नल कनेक्शन के नाम पर छूट  असलियत में झूठ को किरदारों की तरह विज्ञापित करने में लगे हैं। अपनी झूठी शोहबती के लिए गरीबी का मजाक उड़ा रहे हैं। महापौर ऐसा प्रचारित कर रहे हैं कि मात्र 100 रुपए में ही लोगों के घर नल लग जा रहा है। यह नहीं बता रहे हैं कि अब गैर करदाता को 20 महीने तक 100 रुपए कनेक्षन चार्ज का और 60 रुपए जलकर का कुल 160 रुपए चुकाने होंगे। यानि गरीबों को कनेक्षन चार्ज 2000 रुपए देना ही होगा। इसी तरह करदाता को हर महीने 200 रुपए जलकर के साथ 250 रुपए कनेक्षन चार्ज मिलाकर 450 रुपए देने होंगे। यानि आमजन को 5000 रुपए कनेक्षन के लिए देने होंगे।

14 अक्टूबर को नगर निगम प्रशासन ने जारी की विज्ञप्ति

उनकी इस हरकत के कारण 14 अक्टूबर को नगर निगम प्रशासन को बकायदा विज्ञप्ति जारी कर यह बताना पड़ा कि नल कनेक्शन मात्र सौ रुपए में नहीं लग रहा है, बल्कि पूरा चार्ज लोगों से किस्तों में वसूल किया जाएगा। जबकि पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के कार्यकाल में भगीरथी नल जल योजना के तहत शहर के हजारों गरीब परिवारों को मुफ्त में नल कनेक्शन दिया गया था। शहर की ज्यादातर बस्तियों में वर्ष 2005-06 के पहले पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मचती थी। कैंप और खुर्सीपार में लोग तपती धूप में दूर से पानी लाते थे। टैंकर आते ही घंटों इंतजार करने वालों में पानी के लिए झीनाझपटी की स्थिति होती थी। तब उन्होंने सालों से अधूरी जटिल व पेचीदा वृहद पेयजल योजना पर काम शुरू करवाया। उनके ही प्रयास का नतीजा है कि शहर की करीब 5 लाख 79 हजार टाउनशिप की आबादी को छोडकर जनता को रोज 119 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से पानी मिल रहा है। 19,837 भागीरथी और 41,091 निजी व सार्वजनिक नल कनेक्शन के माध्यम से घर-घर शिवनाथ की धारा तो पूर्व मंत्री पांडेय ने ही बहाई।

मध्यप्रदेश शासन काल धनराशि की कमी के कारण धीमी गति से चल रहा था काम

साडा कार्यकाल में 1985.86 की वृहद पेयजल योजना का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जिस योजना को 1986 से प्रारंभ होकर 1991 में पूरा हो जाना था, वह अधूरी पड़ी है। 1987 से लेकर 2002 तक तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन काल धनराशि की कमी के कारण योजना की गति बहुत धीमी रही। 15 साल में 11 करोड़ 49 लाख 90 हजार रूपए मिले, इसमें से 11 करोड़ 59 लाख 85 हजार रूपए खर्च हो चुके थे। 5.33 करोड़ शासकीय अनुदान और बाकी 3 करोड़ 19 लाख 90 हजार शासकीय ऋण और 2.95 करोड़ भारतीय जीवन बीमा निगम से कर्ज लिया गया था। इसके बाद भी शिवनाथ का पानी दुर्ग से भिलाई नहीं पहुंचा था। सिर्फ पाइप की खरीदी कर छोड़ दी गई थी। नदी से लेकर रायपुर नाका तक रोड किनारे पाइप पड़े थे। 22 मार्च 2002 को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने योजना नगर निगम भिलाई को हस्तांतरित कर दी। धनराशि के अभाव में यह योजना 17 साल तक पूरी नहीं हो सकी।

19 साल से अटकी योजना पांच साल में पूरी हो गई

वर्ष 2003 में विधानसभा अध्यक्ष बनते ही पांडेय ने इसमें व्यक्तिगत रूचि ली और शिवनाथ के पानी को भिलाई लाने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य में जुट गए। जल संसाधन विभाग से जल उपलब्धता का कमिटमेंट प्राप्त करने के बाद 7 मई 2005 को शासन वित्त विभाग ने 1 अरब 13 करोड़ 17 लाख फिर 1 अरब 25 करोड़ 77 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी। अंततरू 20 अगस्त 2005 को इस महत्वकांक्षी योजना की आधारशिला रखी। जो योजना 19 साल से अटकी थी मात्र पांच साल में पूरी हो गई। 20 अगस्त 2011 को पीएचई ने योजना पूरी कर नगर निगम को सौंप दी।

2033 तक की अनुमानित 9 लाख आबादी के लिए पहुंचा दिया पानी

पूर्व मंत्री पांडे के पांव नहीं थमे। तेजी से हो रहे शहर के विस्तार को देखते हुए उन्होंने भिलाई जल प्रदाय योजना के फेस.2 के लिए भी पुरजोर प्रयास किया। अमृत मिशन योजना के तहत 242 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की मंजूरी दिलवाई। इससे 66 और 6 एमएलडी क्षमता के दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए। 8 नई टंकियां बनाई गई। अब 2033 तक शहर की अऩमानित आबादी 8 लाख 95 हजार को रोजना 144 लीटर की दर से पानी सप्लाई हो सकेगी।

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