ये कैसी विडंबना : साइंस कॉलेज ने संगीत महाविद्यालय को सिर्फ दो कमरे दिए, उसको भी परीक्षा के लिए वापस ले लिया, ऑडिटोरियम में लगानी पड़ रही कक्षाएं

भिलाई . उच्च शिक्षा विभाग ने दुर्ग जिले में संगीत महाविद्यालय तो खोल दिया, पर इसकी जरूरतों का ख्याल रखना भूल गए। भवन का इंतजाम किए बिना ही साइंस कॉलेज कैंपस में दो कमरों से संगीत महाविद्यालय की शुरुआत करा दी। अब हालात ये हो गए हैं कि संगीत महाविद्यालय अपनी कक्षाएं लगाने दर-बदर भटकता फिर रहा है। दुर्ग संगीत महाविद्यालय की कक्षाएं कभी इधर, उधर के कमरों में लगानी पड़ रही है तो कभी साइंस कॉलेज के पुराने ऑडिटोरियम में कक्षाएं लगाना मजबूरी बन गया है।

इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि, साइंस कॉलेज ने संगीत महाविद्यालय को कैंपस में जो दो कमरे दिए हैं, उनमें भी अल्टरनेटिव कक्षाओं का विकल्प है। यानी कॉमर्स की जब तक कक्षाएं पूरी होंगी तब तक संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थी अपनी बारी का इंतजार करेंगे। कॉमर्स की कक्षा समाप्त होने के बाद उसी कक्ष में सगीत की भी पढ़ाई होगी। अभी साइंस कॉलेज में आंतरिक परीक्षाएं चल रही है। ऐसे में संगीत को दिए गए कमरों में भी परीक्षाएं जारी है।

आंतरिक परीक्षा के चलते ऑक्यूपाइड किए गए कमरों की वजह से संगीत महाविद्यालय की कक्षाएं पुराने ऑडिटोरियम में लगाना  मजबूरी बन गया है। मसला, यह भी है कि संगीत महाविद्यालय को जो दो कमरे दिए गए हैं, वो भी एक साथ नहीं होकर एक इधर तो दूसरा कहीं और है। वॉशरूम के लिए भी दोनों कॉलेजों के विद्यार्थियों में क्लैश हो रहा है।

नए भवन के लिए प्राचार्य ने किया पत्राचार

संगीत महाविद्यालय के खुद के स्थाई भवन के लिए नई प्राचार्य ने हाल ही में दुर्ग तहसीलदार ने मुलाकात कर कॉलेज के लिए जगह की तलाश का आग्रह किया है। तहसीलदार ने उन्हें जगह के विकल्प भी दे दिए, लेकिन जो विकल्प दिए गए वे दुर्ग शहर के न होकर आसपास लगे ग्रामीण क्षेत्रों के थे। संगीत महाविद्यालय ने जगह की तलाश के लिए जिला कलेक्टर से लेकर दुर्ग शहर विधायक गजेंद्र यादव को भी ज्ञापन सौंपा है।

हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने संगीत महाविद्यालय  को नई व्यवस्था बनाने के लिए आसपास के क्षेत्र में किराए का भवन तलाशने का भी विकल्प दिया है। संगीत महाविद्यालय के नियमित संचालन के लिए अभी कम से कम ६ कमरों की जरूरत है, जबकि साइंस कॉलेज कैंपस में सिर्फ दो ही कमरे मिले हैं। कमरों की कमी की वजह से संगीत महाविद्यालय के छात्रों की पढ़ाई में भी बाधा आ रही है। प्राचार्य का डीडीओ पॉवर आना भी अभी बाकी है।

हेमचंद विवि का भवन हो सकता है विकल्प

संगीत महाविद्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग से हुए पत्राचार में कहा है कि दुर्ग हेमचंद  यादव विश्वविद्यालय पोटियाकला में नया भवन बनकर तैयार हो गया है। ऐसे में वे अपने नए भवन में शिफ्ट हो जाएंगे। इसके बाद विवि का पुराना भवन खाली रहेगा जिसे दुर्ग संगीत महाविद्यालय को दिया जा सकता है। इस संबंध में विभाग विचार कर सकता है। हालांकि हेमचंद विश्वविद्यालय भी अपने भवन में कामकाज जारी रखते हुए दो कैंपस से संचालन की तैयारी में है।

बिना संगतकार के संगीत की कक्षाएं

अभी संगीत महाविद्यालय में ५४ विद्यार्थी तीन कोर्स वोकल म्युजिक, फोक के साथ भरतनाट्यम नृत्य की शिक्षा ले रहे हैं। इसके अलावा सहायक विषय हिंदी व अंग्रेजी की कक्षाएं भी संचालित करनी होती है। उच्च शिक्षा विभाग ने फिलहाल नियमित प्राध्यापकों की भर्ती नहीं की है, इसलिए गेस्ट लेक्चरर से ही काम चलाया जा रहा है। पूर्व में संगीत महाविद्यालय को १८ पदों पर स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान में संगीत महाविद्यालय संगतकार नहीं है, जो कि कक्षाओं के संचालन के लिए सबसे जरूरी कड़ी है। संगतकार के अभाव में कहीं न कहीं विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

इस तरह है महाविद्यालय का सेटअप

– प्राचार्य – 1

– सहायक प्राध्यापक – 5

– संगतकार शैक्षणिक – 4

– सहायक ग्रेड – 3

– भृत्य – 2

– बुक लिफ्टर – 1

– स्वच्छक – 1

– चौकीदार – 1


संगीत महाविद्यालय के नए भवन के लिए प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर जगह की तलाश की जा रही है। हाल ही में हमने तहसीलदार से जगह चयन के संबंध में मुलाकात की थी। उच्च शिक्षा विभाग ने टेम्प्रेरी व्यवस्था के तहत किराए के भवन का विकल्प भी दिया है। कक्षाएं नियमित तौर पर संचालित हो रही है।
डॉ. ऋचा ठाकुर, प्राचार्य, संगीत महाविद्यालय दुर्ग