CG Prime News@बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नायब तहसीलदार (Naib Tehsildar) की पुलिस थाने में पिटाई का मामला फिर गरमा गया है। बुधवार को पीडि़त नायब तहसीलदार पुष्पराज मिश्रा, उनके भाई और पिता ने प्रेस वार्ता में अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। नायब तहसीलदार ने कहा कि अभी तक उनके खिलाफ लिखी गई झूठी FIR और समझौते के बाद भी पुलिस केस को खत्म नहीं किया गया है। नायब तहसीलदार ने बताया कि, घटना के बाद 22 नवंबर को कलेक्टर की मौजूदगी में एसपी रजनेश सिंह ने स्वीकार किया था कि पुलिस से गलती हुई थी। जिसके लिए उन्होंने खेद भी जाहिर किया था। इस दौरान टीआई तोपसिंह नवरंग ने भी अपनी गलती मानी थी।
तीन दिन में FIR खत्म करने की बात कही थी
पीडि़त ने मीडिया को बताया कि एसपी ने तीन दिन के भीतर झूठी एफआईआर को खत्म करने की बात कही थी। आज तक एफईआर खत्म नहीं किया गया है। मेरी लड़ाई सिस्टम से नहीं, बल्कि पुलिस के एक जिम्मेदार अफसर से है, जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है। ऐसे अफसर जिन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सीएसपी की भूमिका भी संदिग्ध है। कलेक्टर-एसपी की मौजूदगी में हुए समझौते के बाद भी पुलिस केस को खत्म नहीं कर रही है।
परिचय दिया तो बदल गया रवैया
प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि, जब मैं अपने पिता और भाई के साथ था, तब एक आम इंसान की तरह था। लेकिन, जब उन्हें परिचय दिया और टीआई को इसकी जानकारी दी गई, तब उनका रवैया बदल गया। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट होने की बात कहने के बाद टीआई ने उन्हें थाने बुलाया, जिसके बाद अफसरों को बताया गया कि मैं नशे में हूं और पुलिसकर्मियों के साथ दुव्र्यवहार किया। जबकि, ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था।
CSP के सामने पीटा
नायब तहसीलदार पुष्पराज मिश्रा ने बताया कि, थाने में उन्हें रात करीब दो बजे से सुबह चार बजे तक रखा गया था। तब TI तोप सिंह नवरंग के साथ सीएसपी सिद्धार्थ बघेल भी मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने मेरे साथ मारपीट नहीं किया और नहीं दुव्र्यवहार किया। लेकिन, उनकी मौजूदगी में नायब तहसीलदार के साथ अभ्रदता हुई। इसका मतलब साफ है कि उनकी मौन स्वीकृति थी। यही वजह है कि टीआई ने उनके साथ मारपीट और दुव्र्यवहार किया। सीएसपी चाहते तो हस्तक्षेप कर सकते थे। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया।
आदेशों का किया उल्लंघन
पुष्पराज ने बताया कि, मुझे एक दिन पहले 30 दिसम्बर को विभागीय जांच के लिए बुलाया गया था। बयान देने से पहले पुलिस की तरफ से बताया कि सरकंडा थाना से मिले सीसी टीवी फुटेज में ऑडियो नहीं है। वीडियो के आधार पर जांच चल रही है। नायब तहसीलदार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का शासन को स्पष्ट आदेश है कि थाना में सीसीटीवी फुटेज का वीडियो के साथ आडियो जरूरी है। फुटेज और आडियो को कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है। लेकिन, पुलिस का कहना है कि वीडियो के अलावा उनके पास कोई रिकार्ड नहीं है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि टीआई तोप सिंह नवरंग को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संघ के पास जाने मजबूर होना पड़ेगा
नायब तहसीलदार मिश्रा ने अपने अगले कदम के सवाल पर कहा कि, अगर मुझे न्याय नहीं मिलेगा तो मुझे फिर से अपने संघ के पदाधिकारियों के पास जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। संघ के पदाधिकारियों से अपनी बात रखने और बैठक के बाद आने वाले समय में निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, संघ के पदाधिकारियों ने मुझे साथ खड़े रहने और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है।

