भिलाई . छत्तीसगढ़ के शोधार्थियों को अपनी रिसर्च को बेहतर बनाने अब दुनिया के नामी जर्नल्स का सपोर्ट मिलेगा। एक ही मंच पर देश-दुनिया के वैज्ञानिकों और उनकी रिसर्च को एक्सेस कर पाएंगे। पहले छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को इन रिसर्च जर्नल्स को पढऩे के लिए हजारों रुपए का सब्सिक्रिप्शन खरीदना होता था। उनके कॉलेज भी इस सब्सिक्रिप्शंस को नहीं लेते थे, लेकिन अब विद्यार्थियों और शोधार्थी की यह समस्या दूर हो जाएगी। केंद्र ने इसके लिए एक विशेष प्लेटफार्म को तैयार किया है, जिसका नाम है वन नेशन वन सब्सिक्रिप्शन।
इस योजना के तहत प्रदेश के 53 हजार तकनीकी छात्रों के साथ 9436 रिसर्च स्कॉलर्स को रिसर्च सामाग्रियां आसानी से मिल पाएंगी। प्रदेश के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को उनके प्रोजेक्ट्स के लिए रिसोर्सेस मिलेंगे। दुनियाभर के प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित 13 हजार से अधिक ई-जर्नल्स का सीधा एक्सेस मिल जाएगा। पूरा सिस्टम ऑनलाइन रहेगा। इसकी शुरुआत दिसंबर से होने जा रही है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों को फायदा
इस पहल के बाद सामान्य डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों को रिसर्च जर्नल्स के लिए महंगी सब्सिक्रिप्शन फीस नहीं चुकानी पड़ेगी, जिससे विश्वविद्यालयों का बजट प्रभावित नहीं होगा। वर्तमान में प्रदेश में 14 निजी और शासकीय विश्वविद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 8 हजार रिसर्च स्कॉलर अपनी पीएचडी के लिए रिसोर्स इकट्टा करने इधर-उधर के जर्नल्स का रेफरेंस लिया करते हैं। इसके अलावा प्रदेश के ३ शासकीय और 28 निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी इससे फायदा मिलेगा। यहां के बीटेक और एमटेक विद्यार्थियों को उनके प्रोजेक्ट्स क लिए शोध सामाग्रियां आसानी से मिल पाएंगी। इसका फायदा आर्थिक कमजोर विद्यार्थियों व शोधार्थियों को सबसे अधिक होगा, जो अभी तक रिसर्च के लिए वैश्विक शोध सामाग्रियों तक पहुंच नहीं बना पा रहे थे।
अब डीयू और सीएसवीटीयू दायरे में आएंगे
अभी तक केवल केवल बड़े विश्वविद्यालय और प्रमुख संस्थानों के पास ही इन रिसर्च जर्नल्स का एंट्री एक्सेस था। महंगी सब्सिक्रिप्शन फीस होने से शोधार्थियों को इसका अलग से चार्ज देना पड़ता था। अब छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद विवि, दुर्ग विश्वविद्यालय और कामधेनु विश्वविद्यालय वन सब्सक्रिप्शन के तहत रहेंगे। यह संस्थान अपने विद्यार्थियों को दुनियाभर के रिसर्च जर्नल्स का लाभ दे पाएंगे। इससे अनुसंधान सामग्री की कमी के कारण छात्रों और शिक्षकों को अपने शोध कार्य में रुकावटों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आईआईटी, एनआईटी पर निर्भरता खत्म
अभी आईआईटी भिलाई और एनआईटी रायपुर जैसे संस्थानों के पास ही महंगी रिसर्च जर्नल्स का सब्सक्रिप्शन मौजूद है। किसी अन्य शोधार्थी को इन संस्थानों से रिसर्च जर्नल्स की कॉपी लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। कई बार उन्हें इन संस्थान में अध्ययनरत दोस्तों या परिचितों की मदद लेनी पड़ती थी ताकि वे शोध-पत्रों तक पहुंच बना सकें। वन सब्सक्रिप्शन योजना से अब शोधर्थी को महज एक क्लिक में बिना कोई शुल्क दिए सभी जर्नल्र्स सामने मिलेंगे।
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन केंद्र सरकार की शानदार पहल है। इससे शोधार्थियों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी दुनियाभर के रिसर्च जर्नल्स नि:शुल्क पढऩे मिल जाएंगे। अभी तक यह रिसर्च सामाग्रियां सिर्फ आईआईटी और एनआईटी के पास ही मौजूद थीं। चुनिंदा संस्थान ही इसका लाभ अपने विद्यार्थियों को दे पाते थे।
डॉ. रामकृष्ण राठौर, डीन, रिसर्च एंड डेवलेपमेंट आरसीईटी आर-1 इंजीनियरिंग कॉलेज

