CG Prime News@दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की ओर से लगातार जिलाबदर की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सुपेला थाना क्षेत्र के कॉन्ट्रेक्टर कॉलोनी निवासी हरेराम प्रसाद के खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी किया गया है। जिला दंडाधिकारी दुर्ग के आदेश के मुताबिक हरेराम प्रसाद को एक साल की अवधि के लिए दुर्ग समेत कुल सात जिलों की सीमा से बाहर रहना होगा।
1999 से दर्ज मामलों को बनाया गया आधार
पुलिस के मुताबिक हरेराम प्रसाद के खिलाफ वर्ष 1999 से अलग-अलग आपराधिक और प्रतिबंधात्मक प्रकरण दर्ज होने का रिकॉर्ड उपलब्ध है। पुलिस ने इन मामलों और पूर्व में की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों का विवरण संकलित कर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया था। अभिलेखों और पुलिस प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद जिला दंडाधिकारी ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5(क)(ख) के तहत जिलाबदर का आदेश पारित किया।
मारपीट से लेकर हत्या के प्रयास तक के मामले
जिलाबदर आदेश में दर्ज पुलिस प्रतिवेदन के अनुसार हरेराम प्रसाद के खिलाफ अलग-अलग समय में मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, बलवा, चोरी, जुआ, शासकीय कार्य में बाधा और हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख है। रिकॉर्ड में 1999 से 2015 तक के कई आपराधिक एवं प्रतिबंधात्मक मामलों का जिक्र किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुछ मामलों में भारतीय दंड विधान की धाराओं के साथ जुआ अधिनियम और प्रतिबंधात्मक प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई दर्ज है। इनमें वर्ष 2009 का एक मामला धारा 307 सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज होने का उल्लेख आदेश में किया गया है।
एक सप्ताह में जिले की सीमा से बाहर जाने के निर्देश
जिला दंडाधिकारी के 1 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार हरेराम प्रसाद को आदेश की तिथि से एक सप्ताह के भीतर निर्धारित जिलों की सीमा से बाहर चले जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना वह एक वर्ष तक इन जिलों में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
इन 7 जिलों में प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित
जिलाबदर की अवधि 1 अक्टूबर 2026 से एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान दुर्ग के अलावा रायपुर, धमतरी, बेमेतरा, बालोद, राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की सीमा में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।