भिलाई . साइंस कॉलेज science cillege दुर्ग में सीखने-सिखाने की नई परंपरा का आगाज हो गया है। निजी और शासकीय उपक्रमों में उच्च पदों पर खुद को स्थापित कर चुके कॉलेज के भूतपूर्व छात्र (एलुमनी) कॉलेज के नए विद्यार्थियों की कक्षाएं ले रहे हैं। कॉलेज में इसके लिए गेस्ट लेक्चरर की व्यवस्था बनाई गई है। इस परंपरा की शुरुआत कॉलेज के भूगर्भशास्त्र विभाग से की गई है, जहां भूगर्भशास्त्र के विभिन्न विषयों की जानकारी नए विद्यार्थियों को दी जा रही है।
यह भी पढ़ें : आज से छटना शुरू होंगे बादल, 5 दिसंबर के बाद तापमान 5 डिग्री लुढक़ेगा, फिर बढ़ेगी जिले में ठंड
यह एलुमनी खदानों, कारखानों, स्मेल्टर, इस्पात संयंत्रों आदि में उपयोग की जाने वाली लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दे रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि, यह कोई एक दिन का व्याख्यान नहीं है, बल्कि इसे लगातार किया जा रहा है। वैसे तो साइंस कॉलेज गेस्ट लेक्चरार को कक्षाओं के लिए भुगतान करता है, लेकिन कॉलेज के यह एलुमनी बिना किसी मानदेय और यात्रा भत्ता लिए विभिन्न शहरों से आकर कक्षाएं ले रहे हैं।
जानिए कौन हैं ये एलुमनी
भूगर्भशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि इन एलुमनी में डॉ. बेनीधर देशमुख इग्नू दिल्ली में पदस्थ हैं। वहीं अमित सोनी जीएस आई के डायरेक्टर हैं। भुवनेश्वर कुमार और हिमांशु निगम एमईसीएल भूवैज्ञानिक हैं। डॉ. अभिषेक देवांगन भूवैज्ञानिक सीएमडीसी के पद पर कार्यरत हैं। ओंकार साहू जेपी सीमेंट में हैं। हेमंत धनकर, श्वेता एनएमडीसी में कार्यरत हैं। डॉ. चंचल सिंह, गुडग़ांव, डॉ. स्वपना गुप्ता, जगदलपुर, मनदीप सिंह, जियोलॉजी माइनिंग में कार्यरत हैं। इनकी ही तरह उच्च पदों पर मौजूद धर्मेष साहू, कोमल वर्मा, डॉ. विकास स्वर्णकार, सृष्टि शर्मा, आदित्य मानकर भी सीखने की इस परंपरा का हिस्सा हैं।
साइंस कॉलेज क्यों कर रहा जतन
साइंस कॉलेज दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि, इस कोशिश का फायदा विद्यार्थियों को नई टेक्नोलॉजी से जुडक़र होगा। इस समय इंडस्ट्री, माइनिंग सेक्टर में विभिन्न बदलाव हो रहे हैं। जिसके बारे में विद्यार्थियों को जानना बेहद जरूर है। उन्हें इंडस्ट्री रेडी बनाने के लिए यह एलुमनियों की शुरू की गई यह परंपरा उन्हें नई समझ से रूबरू कराएगी। भूगर्भशास्त्र के क्षेत्र में आ रही नई टेक्नोलॉजी के बारे में समझने का मौका मिलेगा। धीरे-धीरे साइंस कॉलेज इस परंपरा से सभी विषयों को जोड़ेगा। इस समय सैकड़ों की तादाद में कॉलेज के ऐसे एलुमनी हैं जो विभिन्न सेक्टर्स की हाई पोस्ट पर काम कर रहे हैं। कॉलेज अपने एलुमनी से संपर्क करने में लगा हुआ है। जल्द ही शेष विषय भी इसमें शामिल होंगे।
समझा रहे नए रास्ते और विकल्प
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए विद्यार्थियों के पास अवसरों की भरमार हैं। ऐसे में जिस विषय की पढ़ाई कर रहे हैं, उसके अलावा भी उन्हें विभिन्न विषयों की समझ दी जा रही है। इसी कड़ी में एलुमनी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। वे ग्रेजुएशन के बाद खुलने वाले रास्ते नए विद्यार्थियों को समझा रहे हैं। माइनिंग से लेकर सीमेंट संयंत्र और जियोलॉजिकल सेक्टर जैसे दर्जनों विकल्प साझा कर रहे हैं। इनमें नौकरियों ेके लिए जरूरी स्किल्प और तैयारी की जानकारी भी नए विद्यार्थियों को दी जा रही है।
भूगर्भषास्त्र विभाग में विभिन्न केन्द्र एवं राज्य सरकार के प्रतिश्ठानों में उच्च पदों पर आसीन एलुमनी महाविद्यालय आकर यूजी और पीजी के विद्यार्थियों को विषयों की नई जानकारी गेस्ट लेक्चर के जरिए दे रहे हैं। वे दूसरे शहरों और राज्यों से कॉलेज पहुंचकर कक्षाएं लेते हैं। इसके लिए यात्रा भत्ता या पारिश्रमिक भी नहीं लेते।
डॉ. श्रीनिवास डी. देषमुख, साइंस कॉलेज दुर्ग

