जिला अदालत में पारिवारिक विवाद के मामले की सुनवाई
दुर्ग@CG Prime News. जिला न्यायालय में पारिवारिक विवाद के मामले में सुनवाई के दौरान उस समय खुशनुमा माहौल बन गया। जब आरोपी लड़के ने अपनी बड़ी मां का पैर छूकर आशीर्वाद मांग लिया। बड़ी मां ने भी सह्रदयता दिखाते हुए अपने देवर के बेटे को माफ कर दिया और जमीन विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने पर सहमति दे दी। न्यायालय ने भी दोनों पक्षों की सहमति देते हुए आरोपियों को माफ करते हुए प्रकरण राजीनामा के आधार पर समाप्त कर दिया।
यह सब कुछ संभव हुआ जिला न्यायालय में लगाए गए नेशनल लोक अदालत के तहत। अदालत ने राजीनामा के तहत निराकरण के लिए यह प्रकरण रखा था। मामले की पीड़ित 60 वर्षीय महिला का अपने देवर और उसके लड़के के साथ जमीन संबंधी विवाद था। आरोपियों ने महिला के घर का बिजली और नल कनेक्शन तक बंद कर दिया था। पीडि़त की पुलिस में शिकायत के बाद यह मामला न्यायालय में पहुंचा था, जो दोनों पक्षों की रजामंदी और मधुर संबंध के साथ रहने के आश्वासन पर समाप्त हो गया है। नेशनल लोक अदालत में ऐसे 7643 प्रकरणों का निपटारा हुआ। जिसमें समझौता राशि 9.63 करोड़ से ज्यादा रहा।

न्यायमूर्ति भादूड़ी रहे मौजूद
लोक अदालत के दौरान छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गौतम भादूड़ी भी मौजूद रहे। न्यायमूर्ति ने न्यायालय परिसर का अवलोकन किया और खंडपीठ में जाकर पीठासीन अधिकारियों से प्रकरण के संबंध में राजीनामा की कार्रवाई की जानकारी ली। न्यायमूर्ति ने वर्चुअल माध्यम से जुड़े एक प्रार्थी से जानकारी भी ली। लोक अदालत में 2947 न्यायालयीन, 96 प्रीलिटिगेशन और 4600 राजस्व प्रकरण निराकृत किए गए।
चेन्नई से वर्चुअल सुनवाई में जुड़े
एक अन्य मामले में चेन्नई से आवेदक न्यायालय की सुनवाई में हाजिर हुआ। सुपेला थाना के धारा 294, 506 बी के इस मामले में दो आवेदक थे। यह मामला पांच साल से लंबित था। एक प्रार्थी न्यायालय में उपस्थित हुआ, जबकि दूसरी पहली प्रार्थी की बेटी चेन्नई में थी। दूसरी प्रार्थी ने वर्चुअल जुड़कर मामले में समझौते पर सहमति दी।
दिव्यांग के घर जाकर कराया राजीनामा
इस बार नेशनल लोक अदालत में मेनुअल के साथ वर्चुअल भी मामलों की सुनवाई की गई। इसी तरह से एक मामले में जिला न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव के निर्देश पर दिव्यांग प्रार्थी की सुनवाई उसके घर पहुंचकर वर्चुअल माध्यम से की गई। प्रार्थी के घर वॉलिंटियर को भेजा गया, जो वीडियो काफ्रेेंंसिंग के माध्यम से प्रार्थी के जुडऩे में मदद की। यह मामला भी राजीनामा के आधार पर निराकृत कर लिया गया।

