पाकिस्तान से आई सलोचनी 40 वर्ष बाद बनी भारतीय नागरिक, प्रमाण पत्र मिलते ही छलके आंसू, कहा सपना हुआ पूरा

दुर्ग. अस्सी के दशक में मां के साथ पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सक्खर जिले के रोड़ी शहर से आई तीन बहनों का भारतीय नागरिकता (Indian citizenship) का सपना 40 साल बाद अब जाकर साकार हुआ। जब वे भारत आईं थीं तो तीनों बहनें नाबालिग यानि दस बरस से छोटी थीं। उस वक्त पासपोर्ट में अपनी मां के साथ ट्रैवल किया जा सकता था। फ्लाइट से भारत आने के बरसों बाद शुक्रवार को उम्र के चालीसवें दशक में उन्हें भारतीय नागरिकता मिली।

तीन बहनों में बड़ी सलोचनी बाई जब भारत आई तो पांच साल की थी। शुक्रवार को 45 साल की उम्र में उन्हें नागरिकता मिली। इन बहनों के भाई विनोद माखीजा ने बताया कि यह सब आसान तब हुआ जब कलेक्टरों को स्थानीय स्तर पर जांच के पश्चात नागरिकता के नियमों को पूरा करने पर नागरिकता देने का अधिकार केंद्र सरकार द्वारा दिया गया। शुक्रवार को दुर्ग कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने इन्हें नागरिकता का सर्टिफिकेट प्रदान किया।

ऋषि कुमार को भी मिली नागरिकता

इसी तरह दुर्ग जिले के ऋषि कुमार जब सिंध से भारत आए तो उनकी उम्र 12 साल थी। अब उनकी उम्र 55 साल है। उन्होंने बताया कि नागरिकता लंबित होने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब दिक्कत दूर हुई। अब वे पूरे हक से कह सकते हैं कि वे भारत के नागरिक हैं। बतां दें कि दुर्ग जिले सहित छत्तीसगढ़ में पाकिस्तान से आए सैकड़ों लोग नागरिकता के इंतजार में है। धीमी प्रक्रिया होने के कारण वे भारत की नागरिकता लेने से से सालों से वंचित हैं।