लंदन | वेब डेस्क. Priti Patel’s statement on the delay in Nirav Modi’s extradition; impact on India-UK relations. ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण में हो रही लंबी देरी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक आर्थिक अपराधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग तथा विश्वास पर भी असर पड़ा है। पटेल का कहना है कि नीरव मोदी को भारतीय न्याय प्रणाली का सामना करने के लिए काफी पहले भारत भेज दिया जाना चाहिए था।
यह भी पढ़ेः NEET प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, 26 जुलाई तक दर्ज FIR होंगी वापस
डायमंड किंग पॉडकास्ट में रखी अपनी बात
प्रीति पटेल ने यह टिप्पणी डायमंड किंग नामक पॉडकास्ट सीरीज के चौथे एपिसोड में की। यह चार भागों की श्रृंखला नीरव मोदी और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आधारित है। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह जानकर उन्हें आश्चर्य और निराशा हुई कि नीरव मोदी अब भी लंदन में मौजूद है। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति के खिलाफ भारत में गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोप हैं, उसे भारतीय जेल में होना चाहिए।
भारत की नाराजगी का किया जिक्र
पूर्व गृह मंत्री ने दावा किया कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी के कारण भारत सरकार ब्रिटेन के प्रति असंतोष जाहिर कर चुकी थी। उन्होंने कहा कि इस स्थिति का असर दोनों देशों के बीच गैर-कानूनी भारतीय प्रवासियों की वापसी से जुड़े सहयोग पर भी पड़ा। उनके मुताबिक, भारत ने कुछ मामलों में ब्रिटेन से भेजी जाने वाली चार्टर उड़ानों को स्वीकार करने में सख्ती दिखाई थी, जिससे दोनों देशों के बीच समन्वय प्रभावित हुआ।
2021 में दी थी प्रत्यर्पण को मंजूरी
प्रीति पटेल वर्ष 2019 से 2022 तक ब्रिटेन की गृह मंत्री रहीं। उन्होंने वर्ष 2021 में नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। हालांकि, इसके बाद विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं और अपीलों के चलते प्रत्यर्पण अब तक पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण संबंधी कानूनों का उद्देश्य यही है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को संबंधित देश भेजा जाए।
ब्रिटिश न्याय प्रणाली पर भी उठाए सवाल
पटेल ने कहा कि मामले में लगातार हो रही देरी न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर संकेत करती है। उन्होंने इसे ब्रिटेन के करदाताओं के संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग मजबूत होगा।