CG Prime News@दुर्ग. Durg guest teacher protest दुर्ग जिले में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ अतिथि शिक्षकों के धरने पर देर रात पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस ने हिंदी भवन के सामने पिछले 22 दिनों से चल रहे धरना स्थल से टेंट हटाकर जब्त कर लिया। गुरुवार सुबह धरना स्थल पहुंचे करीब 50 अतिथि शिक्षकों को पुलिस बसों में बैठाकर ले गई। धरनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि बाहर से आने वाले नए प्रदर्शनकारी आंदोलन में शामिल न हो सकें।
शिक्षकों की सेवाएं खत्म करने का अल्टीमेटम दिया
इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने हड़ताल पर गए अतिथि शिक्षकों की सेवाएं खत्म करने का अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने डीईओ को निर्देश जारी कर कहा है कि 27 जुलाई तक अतिथि शिक्षक स्कूल नहीं लौटे तो नौकरी जाएगी। इसके साथ ही वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था करने को कहा है।
दुर्ग में अतिथि शिक्षकों के धरने पर पुलिस कार्रवाई, टेंट हटाए, 50 शिक्षक बसों में ले गए
चेतावनी के बाद हुई कार्रवाई
अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि बुधवार दोपहर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें शाम तक धरना समाप्त करने की चेतावनी दी थी। शिक्षकों ने चेतावनी के बावजूद धरना जारी रखा, जिसके बाद देर रात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टेंट हटाकर जब्त कर लिया। पुलिस कार्रवाई के बाद भी अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि वे दोबारा धरना देने की कोशिश करेंगे और जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षा मंत्री के निवास का किया था घेराव
इससे पहले अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का लगभग 24 घंटे तक घेराव किया था। मंत्री से चर्चा कराने के आश्वासन के बाद शिक्षक वहां से लौटकर हिंदी भवन के सामने फिर धरने पर बैठ गए थे। शिक्षकों को उम्मीद थी कि बातचीत के बाद उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला होगा, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। शिक्षकों का कहना है कि सरकार के साथ केवल चर्चा हुई है, पर उनकी किसी भी मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग
अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि उनका आंदोलन संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के बदले समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक कई वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में भी सेवाएं दी हैं, इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है। उनका आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता।