स्टिल्ट + 4 नीति पर PIL से बढ़ी बहस, शहर की क्षमता पर उठे बड़े सवाल

‘स्टिल्ट + 4’ नीति पर PIL से बढ़ी बहस, शहर की क्षमता पर उठे बड़े सवाल

नई दिल्ली। PIL on ‘Stilt + 4’ policy sparks debate; major questions raised about the city’s capacity. देश के तेजी से बढ़ते महानगरों में शहरी विकास को लेकर बहस अब सिर्फ इमारतों की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या तक सीमित नहीं रही है। बढ़ती आबादी के बीच यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि किसी शहर की सड़क, सीवरेज, जलापूर्ति, ड्रेनेज, पार्किंग और आपातकालीन सेवाएं बढ़ते निर्माण और आबादी का अतिरिक्त दबाव कितना संभाल सकती हैं।

स्टिल्ट + 4’ नीति पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक

हरियाणा की ‘Stilt + 4 Floors’ नीति को लेकर अधिवक्ता सुनील सिंह की जनहित याचिका ने इसी मुद्दे को कानूनी और नीतिगत चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर CWP-PIL No. 212 of 2024, Sunil Singh vs. State of Haryana & Another में आवासीय भूखंडों पर स्टिल्ट पार्किंग के ऊपर चार मंजिलों के निर्माण की अनुमति से जुड़े शहरी नियोजन, पर्यावरण, आधारभूत ढांचे और नागरिक सुरक्षा के सवाल उठाए गए। 2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए हरियाणा सरकार को आवासीय भूखंडों के लिए इस नीति पर आगे बढ़ने से रोक दिया। अदालत ने 2 जुलाई 2024 की संबंधित अधिसूचना के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।

गुरुग्राम की जमीनी स्थिति ने बढ़ाई चिंता

मामले से जुड़ी निरीक्षण रिपोर्ट में गुरुग्राम के कुछ इलाकों में निर्धारित सड़क चौड़ाई और वास्तविक उपलब्ध मार्ग के बीच बड़ा अंतर सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 12 मीटर चौड़ी निर्धारित आंतरिक सड़कों वाले कुछ क्षेत्रों में वाहनों और पैदल आवाजाही के लिए वास्तविक मोटरेबल हिस्सा करीब 3.9 से 4.8 मीटर तक ही मिला। रिपोर्ट में सीवरेज और सैनिटेशन की समस्याओं, कचरा प्रबंधन, भूजल रिचार्ज, अत्यधिक आबादी और अनियंत्रित निर्माण जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया गया।

मंजिलों से ज्यादा जरूरी शहर की ‘Carrying Capacity’

PIL के जरिए मूल प्रश्न यह सामने आया है कि अतिरिक्त मंजिलों और बढ़ी हुई density के साथ आने वाली आबादी का भार मौजूदा infrastructure उठा पाएगा या नहीं। सड़क और पार्किंग के अलावा पानी, सीवरेज, storm-water drainage, बिजली, अग्निशमन, emergency response और खुले स्थान भी इस आकलन का हिस्सा होने चाहिए। इसी संदर्भ में Infrastructure Capacity Audit की आवश्यकता महत्वपूर्ण हो जाती है। यानी नई निर्माण अनुमति से पहले यह वैज्ञानिक रूप से देखा जाए कि संबंधित क्षेत्र की मौजूदा सुविधाएं अतिरिक्त आबादी और built-up area को संभालने की स्थिति में हैं या नहीं।

गुरुग्राम से बेंगलुरु तक पहुंची चर्चा

इस मामले की बहस अब व्यापक शहरी नियोजन से जोड़ी जा रही है। बेंगलुरु समेत देश के कई महानगरों में भी भवन की ऊंचाई, सड़क की चौड़ाई, FAR, open space और parking जैसे विषयों पर नियामकीय बदलावों की चर्चा जारी है। हालांकि हरियाणा से जुड़ा हाईकोर्ट का आदेश सीधे दूसरे राज्यों पर लागू नहीं होता, लेकिन इससे सामने आया सवाल देश के बड़े शहरों के लिए अहम है—क्या infrastructure capacity का आकलन किए बिना बढ़ती urban density को मंजूरी दी जानी चाहिए?

नीति-निर्माताओं के सामने पांच अहम सवाल

शहरी विकास की इस बहस में पांच प्रमुख सवाल उभरते हैं—अतिरिक्त मंजिलों से कितनी आबादी बढ़ेगी? सड़क और पार्किंग कितना दबाव सह सकती है? सीवरेज व बारिश के पानी की निकासी पर्याप्त है या नहीं? अग्निशमन वाहनों और emergency services को जरूरी पहुंच मिलेगी या नहीं? और क्या नई निर्माण अनुमति से पहले infrastructure capacity का वैज्ञानिक मूल्यांकन हुआ है? Vertical development महानगरों की जरूरत हो सकती है, लेकिन उसके साथ नागरिक सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है। ऐसे में ‘स्टिल्ट + 4’ विवाद का व्यापक संदेश यही है कि शहर कितना ऊंचा बने, इससे पहले यह देखना जरूरी है कि शहर उस विकास को संभालने के लिए कितना सक्षम है।

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