CG Prime News@रायपुर. छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक मंचों से फटकार लगाए जाने के मामलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अधिकारी-कर्मचारी संगठनों ने इसे प्रशासनिक गरिमा और कर्मचारियों के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकार और जनप्रतिनिधियों से इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हाल के दिनों में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आम लोगों के सामने डांटने और फटकारने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
फेडरेशन ने जताई कड़ी आपत्ति
अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने बयान जारी कर कहा कि शासन व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की स्पष्ट प्रक्रिया पहले से मौजूद है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी से कार्य में लापरवाही या त्रुटि होती है तो उसके लिए विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई की व्यवस्था है। ऐसे मामलों में सार्वजनिक मंच से फटकार लगाना प्रशासनिक मर्यादाओं और स्थापित परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। फेडरेशन का कहना है कि सार्वजनिक आलोचना से न केवल संबंधित कर्मचारी की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र का मनोबल भी कमजोर होता है।
सोशल मीडिया संस्कृति पर भी उठाए सवाल
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और रील्स के बढ़ते प्रभाव के बीच कुछ लोग लोकप्रियता हासिल करने के लिए कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से निशाना बना रहे हैं। संगठन के अनुसार, ऐसे वीडियो और बयान तेजी से वायरल होते हैं, जिससे कर्मचारियों के बीच असुरक्षा और असंतोष की भावना पैदा होती है। फेडरेशन ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रचनात्मक संवाद और समन्वय जरूरी है, न कि सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक व्यवहार।
सम्मानजनक संवाद की मांग
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि जनप्रतिनिधि और कर्मचारी दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। जहां जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं अधिकारी और कर्मचारी सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं को धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच परस्पर सम्मान और सहयोग का वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।
आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि वह जवाबदेही और पारदर्शिता का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन सार्वजनिक अपमान को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मंचों से कर्मचारियों को फटकारने और अपमानित करने की घटनाएं जारी रहीं तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जा सकता है। इसके तहत धरना, प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा
कर्मचारी संगठनों की चेतावनी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं तथा कर्मचारी संगठनों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।