CG Prime News@दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पिछले 23 दिनों से चल रहा अतिथि शिक्षकों का आंदोलन शुक्रवार (24 जुलाई) को 24वें दिन औपचारिक रूप से स्थगित कर दिया गया। हालांकि अतिथि शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। संघ ने सरकार को मांगों पर निर्णय लेने के लिए 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) तक का समय दिया है। यदि इस अवधि में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो 6 सितंबर से पूरे प्रदेश में आंदोलन का नया चरण शुरू किया जाएगा।
शिक्षा सचिव से बैठक के बाद लिया गया फैसला
अतिथि शिक्षक संघ की प्रतिनिधि अर्चना सिंह ने बताया कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर संघ के पदाधिकारियों की शिक्षा सचिव के साथ 22 जुलाई को बैठक हुई। बैठक में अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई। सरकार ने फिलहाल संविलियन संभव नहीं होने की बात कही, लेकिन अन्य तात्कालिक मांगों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया। इसी आश्वासन के आधार पर आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
पुलिस कार्रवाई पर संघ ने जताई नाराजगी
संघ ने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थगित करने की घोषणा से पहले ही पुलिस ने कई पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया। संघ के अनुसार महिला पदाधिकारी तुलसी मैडम को जबरन ले जाने का वीडियो भी सामने आया है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी आंदोलन में शामिल शिक्षकों को रोकने की शिकायत की गई। इन घटनाओं से आंदोलनकारियों में नाराजगी देखी गई।
13 शिक्षकों की गिरफ्तारी का आरोप
अतिथि शिक्षक संघ का दावा है कि पुलिस ने 13 शिक्षकों को हिरासत में लेकर उनसे बॉन्ड भरवाया। संघ के मुताबिक बॉन्ड में छह महीने के भीतर दोबारा आंदोलन करने पर एक लाख रुपये जुर्माने की शर्त शामिल की गई। संघ ने इसे दबाव में कराई गई कार्रवाई बताते हुए इसकी आलोचना की है।
27 जुलाई तक स्कूल लौटने के निर्देश
संघ ने बताया कि अधिकांश अतिथि शिक्षक शनिवार या सोमवार तक अपने-अपने स्कूलों में कार्यभार संभाल लेंगे। दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग पहले ही 27 जुलाई तक सभी अतिथि शिक्षकों को स्कूल लौटने का अल्टीमेटम जारी कर चुका है। विभाग ने तय समय तक कार्य पर नहीं लौटने वालों की सेवा समाप्त करने और उनके स्थान पर वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं।
समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग जारी
अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक वर्षों से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सेवा सुरक्षा, समान वेतन और स्थायी नीति का लाभ नहीं मिला है। संघ ने दोहराया कि यदि 5 सितंबर तक सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 6 सितंबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।