भिलाई BJP की कार्रवाई: मंडल कोषाध्यक्ष भास्कर मुदिलियार 6 वर्ष तक निष्कासित

लोहा चोरी प्रकरण में नाम आने के बाद भाजपा जिला भिलाई ने मंडल कोषाध्यक्ष भास्कर मुदिलियार को छह वर्ष के लिए निष्कासित किया।

लोहा चोरी मामले में संगठन सख्त

भिलाई संगठन ने अनुशासन पर दिखाई सख्ती

भिलाई। Major action by Bhilai BJP: Mandal Treasurer Bhaskar Mudiliar expelled for 6 years. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिला भिलाई ने संगठनात्मक अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए वैशाली नगर मंडल के कोषाध्यक्ष भास्कर मुदिलियार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है।

जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। भाजपा की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया है कि प्रदेश संगठन के निर्देश तथा जिला संगठन प्रभारी रामजी भारती की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया। संगठन ने इसे अनुशासन और पार्टी की कार्यप्रणाली के अनुरूप उठाया गया कदम बताया है।

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लोहा चोरी प्रकरण के बाद हुई कार्रवाई

जारी आदेश के मुताबिक भास्कर मुदिलियार का नाम भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़े कथित लोहा चोरी प्रकरण में सामने आया है। साथ ही संबंधित मामले में न्यायालय द्वारा उन्हें आरोपित घोषित किए जाने के बाद भाजपा ने संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया।

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भाजपा ने स्पष्ट किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में संगठन अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का कहना है कि संगठन की छवि और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

वरिष्ठ नेताओं को भेजी गई आदेश की प्रतिलिपि

निष्कासन आदेश की प्रतिलिपि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कंडेय, दुर्ग संभाग प्रभारी जगन्नाथ पाणिग्रही और जिला संगठन प्रभारी रामजी भारती सहित संबंधित पदाधिकारियों को भी भेजी गई है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

भिलाई में पहले से चर्चा में रहे लोहा चोरी प्रकरण के बीच भाजपा की इस कार्रवाई को संगठन में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि संबंधित प्रकरण की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से पार्टी ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि गंभीर मामलों में संगठनात्मक जवाबदेही से समझौता नहीं किया जाएगा।

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