WhatsApp Blackmailing Case: अश्लील फोटो भेजकर ब्लैकमेलिंग

दुर्ग के जामुल थाना क्षेत्र में कथित WhatsApp ब्लैकमेलिंग मामले में कोर्ट ने FIR दर्ज कर जांच के निर्देश दिए।

₹52.50 लाख वसूली का दावा; कोर्ट ने FIR के दिए निर्देश

दुर्ग। WhatsApp Blackmailing Case: Accusation of blackmailing by sending obscene photos. जिले के जामुल थाना क्षेत्र में WhatsApp के जरिए कथित ब्लैकमेलिंग और लाखों रुपये की वसूली का मामला सामने आया है। प्रार्थी मनोज कुमार वर्मा की शिकायत पर न्यायालय ने जामुल पुलिस को FIR दर्ज कर मामले की विधिवत जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सौरभ चौबे ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था।

महिलाओं के नाम से WhatsApp पर संपर्क का आरोप

न्यायालय में दिए गए आवेदन के अनुसार कुछ लोगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से महिलाओं के नाम का इस्तेमाल करते हुए प्रार्थी से WhatsApp पर संपर्क किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान अश्लील तस्वीरें भेजी गईं। इसके बाद पुलिस में शिकायत कर झूठे मामले में फंसाने की धमकी देते हुए कथित तौर पर पैसों की मांग की गई। प्रार्थी ने अपने आवेदन में दावा किया है कि इस पूरी कथित ब्लैकमेलिंग के दौरान उससे कुल 52.50 लाख रुपये की राशि ली गई। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट होगी।

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दो आरोपियों और मोबाइल नंबरों की जांच होगी

आवेदन में शेख सलीम और सुभाष पटेल सहित कुछ अन्य मोबाइल नंबर धारकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रार्थी का आरोप है कि अलग-अलग नंबरों से लगातार संपर्क कर उस पर दबाव बनाया गया और रकम देने के लिए मजबूर किया गया। मामले में अब पुलिस कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, WhatsApp बातचीत, पैसों के लेन-देन और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर सकती है।

पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट पहुंचा मामला

प्रार्थी के अनुसार, उसने मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायतें दी थीं। शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उसने न्यायालय की शरण ली। इसके बाद BNSS की धारा 175(3) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि WhatsApp के जरिए कथित ब्लैकमेलिंग किस तरह की गई, किन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ और ₹52.50 लाख के कथित लेन-देन से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।

कोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध

न्यायालय ने आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच से संबंधित सामग्री का अवलोकन किया। आदेश में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध घटित होना दर्शित माना गया। इसके बाद आवेदन स्वीकार करते हुए संबंधित दस्तावेज जामुल थाना पुलिस को भेजने के निर्देश दिए गए।न्यायालय ने पुलिस को FIR दर्ज कर मामले की विवेचना करने और जांच पूरी होने के बाद अंतिम प्रतिवेदन संबंधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

क्या कहते है अधिवक्ता का पक्ष

प्रार्थी के अधिवक्ता सौरभ चौबे के अनुसार जब पुलिस स्तर पर शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो कानून न्यायालय के समक्ष जाने का विकल्प देता है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए FIR के निर्देश दिए हैं। मामले की वास्तविक स्थिति अब पुलिस विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगी।

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