BSP के मकदम यार्ड से स्क्रैप चोरी का खुलासा, संगठित नेटवर्क पर पुलिस की नजर

BSP से करोड़ों के स्क्रैप चोरी का खुलासा, 3 गिरफ्तार ट्रांसपोर्टर और गोदाम मालिक फरार

भिलाई। Theft of scrap worth crores from BSP exposed, 3 arrested, transporter and warehouse owner absconding. भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से करोड़ों रुपए के लोहा स्क्रैप चोरी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आरोपी को गिरफ्तार किया है। चोरी में इस्तेमाल वाहनों और भारी मात्रा में स्क्रैप सामग्री को जब्त किए है। इस पूरे नेटवर्क में शामिल ट्रांसपोर्टर संजय सिंह और गोदाम मालिक मो. सलीम अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे रैकेट के पीछे संभावित मिलीभगत की जांच में जुट गई है।

भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के दमन भट्टी विभाग स्थित मकदम यार्ड से स्क्रैप चोरी का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चोरी का माल और इस्तेमाल किए गए वाहनों को बरामद किया है। मामले में संगठित स्क्रैप माफिया नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।

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बीएसपी के मकदम यार्ड से हो रही थी चोरी

भिलाई तीन थाना टीआई अंबर भरद्वाज ने बताया कि राजेश चमोसीरकर ने थाना भिलाई भट्टी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 26 मई 2026 को फ्लू डस्ट के साथ लोहे का स्क्रैप अवैध तरीके से बाहर भेजा जा रहा था। इसके लिए वाहन क्रमांक CG04 QT 8797 और CG08 AW 1475 का उपयोग किया गया।

पुरानी भिलाई के गोदाम में मिला चोरी का माल

शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी। इसके बाद पुरानी भिलाई क्षेत्र स्थित एक ट्रेडर्स के गोदाम में छापा मारा गया। यहां से चोरी किया गया स्क्रैप और दोनों वाहन बरामद किए गए। साथ ही गोदाम में खड़े अन्य संदिग्ध वाहनों की भी जांच की गई। प्रारंभिक जांच में बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं।

मिलीभगत के एंगल पर जांच

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बीएसपी जैसे संवेदनशील सार्वजनिक उपक्रम से लगातार बड़े स्तर पर हो रही चोरी बिना अंदरूनी मदद के संभव नहीं हो सकती। सूत्रों का कहना है कि कुछ कर्मचारियों और स्थानीय नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एसएसपी विजय अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूरे रैकेट को खत्म किया जाए और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 303(2), 317(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। धारा 303(2) चोरी से संबंधित है, जबकि धारा 317(4) आदतन चोरी का माल खरीदने और बेचने वालों पर लागू होती है। इस धारा में आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।

बीएसपी और CISF के उच्च अधिकारियों की मिली भगत की दुर्गंध

दूसरी ओर, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बीएसपी प्लांट की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के पास है। प्लांट के मुख्य गेट और संवेदनशील क्षेत्रों में जवान तैनात रहते हैं। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर स्क्रैप बाहर कैसे पहुंचा, इसे लेकर लोगों में चर्चा है। कई लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।

 बीएसपी प्लांट से रोज 8-10 ट्रीप लगाती थी गाड़ी

बीएसपी प्लांट से चोरी कर करोड़ों रुपए का स्क्रैप हथखोज में पकड़ाया है, लेकिन इनती बड़े पैमाने पर लोहा चोरी करना बड़े सवाल खड़े हो रहे है। बीएसपी के मुख्य दरवाजे से चोरी के लोहा से भरी गाड़िया निकलती थी। सूत्रों के अनुसार, चोरी में इस्तेमाल होने वाले वाहन रोजाना 8 से 10 ट्रिप लगाते थे। इतना बड़ा संचालन लंबे समय तक बिना किसी संदेह के चलता रहा। यही वजह है कि अब सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

भिलाई तीन थाना प्रभारी को इसकी भनक कैसे नहीं, अक्सर हथखोज में रहती है पेट्रोलिंग टीम 

बीएसपी प्लांट से हथखोज के बीच तीन थाना पड़ता है। जहां से आरोपी ट्रांसपोर्टर संजय सिंह लोहा चोरी कर परिवहन कर रहा था। चौक चौराहे पर पुलिस हेलमेट, तीन सवारी, नो इंट्री और शराब पीकर वाहन चलाने वालों की लगातार जांच होती है, लेकिन इन गाड़ियों की संदेह में भी कभी जांच नहीं हुआ। बड़ा सवाल भिलाई तीन थाना प्रभारी पर खड़े हो रहे है। उनको इसकी जानकारी थी या नहीं। जबकि पेट्रोलिंग टीम अकलोरडीह चौक पर रोज खड़ी रहती है। उस कंपनी तक पुलिस गाड़ी को देखा गया है।

 

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