भिलाई। Mobile forensic van service started in Durg, scientific investigation will be done at the spot itself. अपराध जांच को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में दुर्ग जिले को बड़ी सौगात मिली है। भिलाई सेक्टर-4 स्थित क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मोबाइल फोरेंसिक वैन सेवा शुरू की गई है। करीब 60 लाख रुपए लागत की इस वैन को शनिवार को प्रदेश के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में सांसद विजय बघेल भी मौजूद रहे।
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घटनास्थल पर तुरंत होगी वैज्ञानिक जांच
नई मोबाइल फोरेंसिक वैन अत्याधुनिक उपकरणों और डिजिटल जांच तकनीकों से लैस है। इसके जरिए अब हत्या, दुर्घटना, साइबर अपराध और अन्य गंभीर मामलों में घटनास्थल पर ही प्राथमिक वैज्ञानिक परीक्षण किया जा सकेगा। इससे साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से संकलित करने में मदद मिलेगी और जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक बनेगी।
मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि बदलते समय में अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल फोरेंसिक वैन कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
साइबर और डिजिटल अपराधों की जांच को मिलेगा बल
दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि वैन में उपलब्ध आधुनिक तकनीक के जरिए घटनास्थल पर तत्काल तकनीकी सहायता और प्रारंभिक वैज्ञानिक परीक्षण संभव होगा। इससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और पुलिस को सटीक साक्ष्य जुटाने में मदद मिलेगी।
क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. पंकज ताम्रकार ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल फोरेंसिक वैन से घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर साक्ष्यों का प्राथमिक परीक्षण करने में सुविधा मिलेगी, जिससे विवेचना अधिक प्रभावी होगी।
कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विधायक ललित चन्द्राकर, देवेन्द्र यादव, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, संभाग आयुक्त एसएन राठौर, डीआईजी-एसएसपी विजय अग्रवाल, कलेक्टर अभिजीत सिंह, अपर सत्र न्यायाधीश दीपक खोसले और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।