CG Prime News@दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत की गई है। शासन के आदेश में एक महिला दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के वेतन से कथित तौर पर 1.49 लाख रुपये से अधिक की राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने के मामले के साथ विश्वविद्यालय में अधिकारों के कथित दुरुपयोग और अन्य अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला घटनाक्रम
भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का सिलसिला सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हुआ था। 29 सितंबर को उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें कुलसचिव के पद से हटाकर रायपुर स्थित उच्च शिक्षा संचालनालय में अटैच कर दिया था। उनकी जगह दुर्ग के शासकीय वीवाईटी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस आदेश को कुलदीप ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने शासन के अटैचमेंट आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद कुलदीप विश्वविद्यालय में दोबारा कार्यभार संभालने पहुंचे, लेकिन उनके कक्ष में ताला लगा मिला। अब 12 अक्टूबर को उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है।
महिला कर्मचारी के वेतन से जुड़ा है मामला
कुलदीप के खिलाफ दुर्ग के मोहन नगर थाने में 3 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन से संबंधित है। आरोप है कि कर्मचारी का मासिक वेतन 11,515 रुपये निर्धारित होने के बावजूद उन्हें केवल 2,200 रुपये दिए जाते थे। शेष राशि फोनपे या पेटीएम के माध्यम से कुलदीप के बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी।
1.49 लाख रुपये के लेनदेन की जांच
पुलिस के अनुसार, 6 फरवरी 2025 से 4 जुलाई 2026 के बीच कथित तौर पर कुल 1,49,384 रुपये का लेनदेन हुआ। इस मामले में कुलदीप को 3 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और उसी दिन थाने से मुचलके पर रिहा कर दिया गया था।
निलंबन अवधि में रायपुर होगा मुख्यालय
राज्य शासन ने निलंबन अवधि के दौरान भूपेंद्र कुलदीप का मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, अटल नगर, नवा रायपुर निर्धारित किया है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है। आपराधिक मामले में दोष सिद्ध होने का फैसला अदालत ही करेगी।