CG Prime News@बालोद. छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पंचायत भवन के भीतर कथित तौर पर बिना अनुमति मेडिकल कैंप लगाने का मामला सामने आया है। डौंडीलोहारा ब्लॉक के कोरगुड़ा गांव में लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों से 100 रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क लेकर BP, शुगर, थायराइड, लिवर और हार्ट से जुड़ी जांच किए जाने का आरोप है। जांच के बाद कुछ ग्रामीणों को अलग-अलग बीमारी बताकर 1 हजार से 4 हजार रुपए तक की दवाइयां और हेल्थ प्रोडक्ट दिए गए। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने NGO से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से वाहन, दवाइयां, हेल्थ प्रोडक्ट और अन्य सामग्री मिलाकर 7 लाख 18 हजार 597 रुपए का सामान जब्त किया गया है।
100 रुपए में जांच, फिर महंगे हेल्थ प्रोडक्ट देने का आरोप
जानकारी के अनुसार 30 सितंबर को गांव में मुनादी कर मेडिकल कैंप की जानकारी दी गई थी। इसके अगले दिन यानी 1 अक्टूबर को पंचायत भवन में शिविर लगाया गया। यहां आने वाले ग्रामीणों से 100 रुपए पंजीयन शुल्क लिया गया। इसके बाद विभिन्न स्वास्थ्य जांच की गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के बाद उन्हें गंभीर बीमारियों की जानकारी देकर महंगे उत्पाद खरीदने के लिए कहा गया। इनकी कीमत करीब 1 हजार से 4 हजार रुपए तक बताई गई। कुछ उत्पादों को यौन क्षमता बढ़ाने वाला बताकर भी दिया गया।
पोस्टर में विधायक अनिला भेड़िया की तस्वीर
कैंप के प्रचार पोस्टर में कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया की तस्वीर भी लगाई गई थी। पोस्टर में इलाज पर 8 हजार रुपए से अधिक खर्च होने का दावा करते हुए इसे सिर्फ 100 रुपए में कराने और ‘100 बीमारी, एक इलाज’ जैसे दावे किए गए थे। वहीं, संबंधित पंचायत का कहना है कि मेडिकल कैंप लगाने के लिए न तो कोई आवेदन दिया गया था और न ही पंचायत से अनुमति ली गई थी।
समाजसेवी की शिकायत के बाद पुलिस की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलने पर समाजसेवी तरुण नाथ योगी मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने कथित डॉक्टर राजेश कुमार कोठारी (40), टी. वेंकटेश राव (47), सुरेन्द्र पटेल (29) और मोहित कुमार रक्सेल (38) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने चारों के खिलाफ BNS की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया है। जब्त सामान, दस्तावेज और ग्रामीणों से लिए गए पैसों की जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग भी कर रहा जांच
CMHO डॉ. जेएल उइके के मुताबिक मेडिकल कैंप आयोजित करने से पहले आवश्यक अनुमति लेना जरूरी है। विभाग के अनुसार इस कैंप के लिए स्वास्थ्य विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। अब यह भी जांच की जा रही है कि ग्रामीणों की जांच करने वाले लोगों के पास संबंधित वैध योग्यता और आवश्यक अनुमति थी या नहीं। बालोद SDOP विनय कुमार साहू ने बताया कि जब्त सामग्री और संबंधित दस्तावेजों की जांच जारी है। पुलिस NGO की भूमिका, शिविर में इस्तेमाल किए गए उत्पादों और ग्रामीणों से लिए गए पैसों समेत पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।