CG Prime News@रायपुर. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़े बहुचर्चित पेपर लीक और कथित भर्ती घोटाले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना हत्या से भी बड़ा अपराध है। अदालत की इस टिप्पणी को परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और युवाओं के विश्वास की रक्षा के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे अपराध लाखों युवाओं के भविष्य और पूरे समाज के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में गंभीरता और सार्वजनिक हित सर्वोपरि है।
क्या है पूरा मामला?
CGPSC 2021 भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। मामले में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और अन्य अधिकारियों पर अपने रिश्तेदारों एवं कथित रूप से पसंदीदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। CBI के अनुसार, जीवन किशोर ध्रुव ने 6 अक्टूबर 2020 को आयोग के सचिव का पद संभाला था और उनके हस्ताक्षर से ही 2021 भर्ती परीक्षा का विज्ञापन जारी किया गया था।
बेटे को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र देने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि पूर्व सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही प्राप्त कर लिए और उन्हें अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाया। जांच के मुताबिक इसी आधार पर सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ। CBI ने भिलाई स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त किए।
तलाशी में मिले अहम साक्ष्य
CBI की जांच में मुख्य परीक्षा के पेपर-7 (सामान्य अध्ययन) के 47 में से 42 प्रश्नों के उत्तर तथा पेपर-2 (निबंध) से जुड़ी उत्तर-पुस्तिकाएं बरामद होने का दावा किया गया। इसके अलावा जिन चार विषयों—क्रिप्टोकरेंसी, रूस-यूक्रेन युद्ध, दंतेवाड़ा जिले का विकास और छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम—की परीक्षा से पहले तैयारी कराई गई थी, वही विषय मुख्य परीक्षा में पूछे जाने का भी उल्लेख जांच में किया गया है।
बचाव पक्ष और CBI के तर्क
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि जीवन किशोर ध्रुव को केवल सचिव पद पर रहने के कारण आरोपी बनाया गया है। उनका नाम मूल FIR में नहीं था और उन्होंने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को देकर खुद को गोपनीय कार्यों से अलग कर लिया था। साथ ही यह भी कहा गया कि वे सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं तथा CBI आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
दूसरी ओर CBI ने अदालत से कहा कि आरोपी एक उच्च जिम्मेदारी वाले लोक सेवक थे, जिन पर परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने का दायित्व था। एजेंसी का दावा है कि बरामद दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाहों के बयान कथित आपराधिक साजिश की पुष्टि करते हैं। इन तर्कों के आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।