CG Prime News@दुर्ग. Rural Agricultural Extension Officer Dismissed from Service in Durg दुर्ग जिले में पदस्थ एक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। विशेष न्यायालय (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम) रायपुर द्वारा गंभीर आपराधिक प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए संभागीय संयुक्त संचालक कृषि, संभाग-दुर्ग गोपिका गभेल ने त्वरित शासकीय प्रक्रिया के तहत गंभीर कदाचरण के दोषी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पदच्युत (बर्खास्त) कर दिया है।
सभी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित
शासन के नियमों के तहत नौकरी से निष्कासित किए जाने के बाद अब वे भविष्य में किसी भी शासकीय नियोजन (सरकारी नौकरी) के लिए पूरी तरह से अयोग्य होंगे। इसके साथ ही, दोषसिद्धि की तिथि से उन्हें किसी भी प्रकार के शासकीय सेवा परिलाभों की पात्रता नहीं होगी ।
पुलिस ने किया था गिरफ्तार
विकासखण्ड मानपुर, जिला मोहला-मानपुर-अं.चौकी के क्षेत्र सीतागांव में पदस्थ रहे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू, पिता रोहित साहू के विरुद्ध नगर पुलिस अधीक्षक माना, जिला रायपुर द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर 8 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
इस हेतु उन्हें पूर्व में उप संचालक कृषि, जिला मोहला-मानपुर-अं.चौकी द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित भी किया गया था। इस गंभीर आपराधिक मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट रायपुर द्वारा 2 मई 2026 को देवनारायण साहू को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(ड), धारा 69 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(ट) के तहत दोषी पाते हुए क्रमश 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास सहित अर्थदंड से दंडित किया गया है।
की गई प्रशासनिक कार्रवाई
न्यायालय द्वारा कर्मचारी को गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध पाए जाने के बाद विभाग द्वारा यह कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। संयुक्त संचालक कृषि द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी का उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 (1) के अंतर्गत अत्यंत गंभीर कदाचरण और नैतिक पतन की परिधि में आता है। जिससे उनका शासकीय सेवा में बने रहना सर्वथा अशोभनीय हो गया है।
जारी किया गया बर्खास्तगी आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई शासकीय सेवक अदालत से दोषी सिद्ध हो जाता है, तो उसे सेवा से हटाने के लिए अलग से किसी लंबी विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं होती। इसी आधार पर, संचालनालय से प्राप्त निर्देशों का पालन करते हुए संयुक्त संचालक कृषि ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीधे बर्खास्तगी का अंतिम आदेश जारी किया है।