सीधे PM चुनाव कराने की तैयारी!
नई दिल्ली। इजरायल में चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से नई सरकार के गठन का रास्ता अब तक साफ नहीं हुआ है। वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी खेमे ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। इस बीच देश में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव की व्यवस्था लागू करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।
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सीधे प्रधानमंत्री चुनने के प्रस्ताव पर मंथन
इजरायल में पिछले एक दशक से चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर बार-बार राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बनी है। अब इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश हो रही है। इसके तहत प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे मतदान कराने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मुद्दा मौजूदा विपक्षी खेमे में उठाया गया है। संभावना है कि नई संसद के पहले सत्र में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया जाए। इस व्यवस्था के लागू होने पर प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता करेगी। इसके लिए नीसेट में बहुमत का समर्थन अनिवार्य नहीं होगा। यह व्यवस्था काफी हद तक अमेरिका की राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली जैसी हो सकती है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
नेतन्याहू विरोध में सड़कों पर उतरे लोग
दूसरी ओर, नेतन्याहू सरकार के खिलाफ इजरायल के कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, तेल अवीव, बीरशेबा, हाइफा और तईबा में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे।
प्रदर्शनकारियों ने मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों से मिलकर सरकार बनाने की अपील की। उनका कहना था कि चुनाव में नेतन्याहू विरोधी मतों को बहुमत मिला है। इसलिए विपक्षी दलों को आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ आना चाहिए।
67 सांसदों के समर्थन का दावा
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नीसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू विरोधी मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के पास कुल 67 सांसदों का समर्थन है। वहीं, लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 53 सांसद बताए गए हैं।
स्पीकर को हटाकर नेतन्याहू को घेरने की तैयारी
इस राजनीतिक खींचतान के बीच विपक्षी दलों ने एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। नेतन्याहू के करीबी माने जाने वाले लिकुड नेता आमिर ओहाना को नीसेट के स्पीकर पद से हटाने पर सहमति बन गई है।
विपक्ष का मानना है कि स्पीकर पद पर बदलाव से नेतन्याहू खेमे पर राजनीतिक दबाव बढ़ेगा। हालांकि, सरकार गठन को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में इजरायल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।