बिहान और महतारी वंदन से बदली पार्वती की जिंदगी, बनीं आत्मनिर्भर

बिहान और महतारी वंदन योजना से स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़तीं पार्वती देवांगन और समूह की महिलाएं।

मसाला-बेसन का कारोबार कर बनी आत्मर्निभर, स्वरोजगार से मिली नई पहचान

दुर्ग। Bihan’ and ‘Mahtari Vandan’ transformed Parvati’s life; she became self-reliant. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संचालित योजनाओं का असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। दुर्ग जिले के ग्राम महमरा की पार्वती देवांगन ने बिहान ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर स्वरोजगार की राह चुनी और आज अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं।

यह भी पढ़ेः दुर्ग में कोटवारी भूमि बेचने वाले 29 कोटवारों पर कार्रवाई

परिवार की सहमति से शुरू किया कारोबार

पार्वती देवांगन बताती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों की जानकारी और मार्गदर्शन मिला। परिवार के सदस्यों से चर्चा के बाद उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को साथ लेकर मसाला और बेसन उत्पादन का काम शुरू किया। मेहनत और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के कारण उनके तैयार सामान की स्थानीय बाजार में मांग बढ़ने लगी। इससे समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए नियमित आमदनी का रास्ता तैयार हुआ।

महतारी वंदन की राशि का करती हैं निवेश

पार्वती और बिहान समूह की अन्य महिलाएं महतारी वंदन योजना की हितग्राही हैं। उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग वे जरूरत के अनुसार कारोबार में सामान खरीदने और छोटे निवेश के लिए करती रही हैं। इससे उनके काम को आगे बढ़ाने में मदद मिली है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी आर्थिक सहारा मिला।

रक्षाबंधन से पहले अग्रिम किस्त ने बढ़ाई खुशी

रक्षाबंधन पर्व से पहले महतारी वंदन योजना की किस्त अग्रिम रूप से मिलने से महिलाओं में खास उत्साह है। पार्वती देवांगन ने बताया कि इस बार मिली राशि का उपयोग वे त्योहार की तैयारियों और परिवार के साथ खुशियां मनाने में करेंगी। उनके अनुसार समय पर मिली आर्थिक सहायता से त्योहार की खुशी और बढ़ गई है।

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

पार्वती देवांगन का कहना है कि पहले परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, लेकिन स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से आत्मविश्वास बढ़ा है। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। महमरा की पार्वती और उनके समूह की महिलाएं ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं।

Related posts

नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही से157 मौतें, ग्लेशियर झील फटने की आशंका

दुर्ग प्रमुख मार्गों पर धरना-प्रदर्शन व रैली पर रोक, तितुरडीह में तय प्रदर्शन स्थल

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, दुर्ग के 445 वरिष्ठ नागरिक जाएंगे प्रयाग-काशी