11 महीने बाद मां-बेटी का मिलन: भिलाई आश्रम में छलका ममता का सैलाब

भिलाई के फील परमार्थम सेंटर में 11 महीने बाद मां-बेटी का भावुक मिलन।

भावुक कर देने वाली कहानी

भिलाई | Mother and daughter reunite after 11 months: An outpouring of affection at Bhilai Ashram. सेक्टर-1 स्थित फील परमार्थम सेंटर में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला, जब 11 महीने से बिछड़ी मां को सामने देखकर बेटी पूजा खुद को रोक नहीं सकी। वह दौड़कर अपनी मां से लिपट गई और फूट-फूट कर रो पड़ी। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

यह भी पढ़ेः कुम्हारी सिलेंडर ब्लास्ट, एक साथ जली 4 चिता, मोहल्ले वाले भी नहीं रोक पाए आंसू

32 साल पुराना दर्द, मां-बेटी का सहारा बना रिश्ता

बबीता देवी और उनकी बेटी पूजा की कहानी संघर्ष, दर्द और अटूट प्रेम से भरी है। करीब 32 साल पहले पूजा के पिता पुण्यदेव सिंह का अपहरण हो गया था और आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। इस सदमे ने बबीता देवी की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला, लेकिन उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को संभालते हुए जीवन बिताया।

10 दिन कहकर निकलीं, 11 महीने तक नहीं लौटीं

65 वर्षीय बबीता देवी 3 जून 2025 को मायके जगतपुर (बांका) जाने की बात कहकर घर से निकली थीं। उन्होंने बेटी से कहा था कि 10 दिन में लौट आएंगी, लेकिन फिर अचानक लापता हो गईं। इसके बाद पूजा ने मां की तलाश में भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार और नौगछिया तक खोजबीन की। वह बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और कई आश्रमों में मां को ढूंढती रही।

भिलाई आश्रम में मिली जिंदगी की उम्मीद

भिलाई से करीब 15 किलोमीटर दूर कचांदुर मोड़ के पास बबीता देवी विक्षिप्त अवस्था में मिलीं। इसके बाद अमित राज उन्हें आश्रम ले आए। यहां इलाज और देखभाल के बीच वह बार-बार घर जाने की बात करती रहीं। 10 मई को उन्होंने ‘जगतपुर बांका’ नाम बताया, जिसके बाद आश्रम प्रबंधन ने पुलिस से संपर्क किया।

नौकरी छोड़ी, जनरल बोगी से मां के पास पहुंची बेटी

11 मई को जब पूजा को फोन पर मां के मिलने की सूचना मिली तो उसने बिना देर किए भिलाई आने का फैसला किया। कोचिंग संस्थान से छुट्टी नहीं मिलने पर उसने साफ कहा—“नौकरी मेरी मां से बड़ी नहीं।” इसके बाद वह साउथ बिहार एक्सप्रेस की जनरल बोगी से सफर कर भिलाई पहुंची।

बिछड़ों का सहारा बना सेंटर

फील परमार्थम सेंटर अब तक 200 से अधिक बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को आश्रय दे चुका है। संस्था 55 लोगों को उनके परिवारों से मिला चुकी है। वर्तमान में यहां 96 लोग रह रहे हैं।

Related posts

केरलम के नए CM बने वी डी सतीशन, पारावूर सीट से हैं विधायक

देश के 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR सर्वे

जांजगीर-चांपा में सामूहिक हत्याकांड: पति-पत्नी और 2 बच्चों की निर्मम हत्या