CG Prime News@कोरिया. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर स्थित जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रिलायंस जियो के खराब नेटवर्क से जुड़े मामले में कंपनी को ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण उपभोक्ता को परेशानी हुई और कंपनी अपेक्षित सेवा उपलब्ध कराने में सफल नहीं रही।
मामला सलका गांव के रहने वाले अभिनय पांडेय से जुड़ा है। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लास तथा इंटरनेट से नोट्स डाउनलोड करते थे। उनके क्षेत्र में कई महीनों से जियो नेटवर्क (jio network) की स्थिति खराब थी। कॉल बार-बार डिस्कनेक्ट होने के साथ इंटरनेट की स्पीड भी काफी कम रहती थी। इसका सीधा असर उनकी ऑनलाइन पढ़ाई पर पड़ा।
छह महीने में सुधार का दिया था भरोसा
अभिनय पांडेय ने 21 सितंबर 2023 को जियो के अपीलीय अधिकारी को ई-मेल के जरिए नेटवर्क समस्या की शिकायत की थी। कंपनी ने अगले दिन जवाब देते हुए समस्या को स्वीकार किया और करीब छह महीने में नेटवर्क व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया था। हालांकि, शिकायत के बाद लंबा समय गुजरने के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई।
इसके बाद पांडेय ने अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में केंद्र सरकार के PG Portal पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों के जवाब में कंपनी की ओर से नेटवर्क कवरेज को लेकर अलग-अलग जानकारी दी गई। एक जवाब में क्षेत्र में बेहतर कवरेज होने की बात कही गई, जबकि दूसरी शिकायत में उसी स्थान को सीमित कवरेज वाला बताया गया।
नंबर पोर्ट कराने की सलाह पर पहुंचा मामला आयोग तक
नेटवर्क सुधार की मांग के बजाय दूसरी कंपनी में मोबाइल नंबर पोर्ट कराने की सलाह मिलने के बाद उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष राकेश पांडेय और सदस्य चूरामन दास ने कंपनी की दलीलों पर विचार किया। आयोग ने कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है कि वह ग्राहकों को अपेक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराए। आयोग के अनुसार, नेटवर्क की समस्या का समाधान नहीं होना और ग्राहक को दूसरी कंपनी में जाने की सलाह देना सेवा में कमी की स्थिति को दर्शाता है।
10 हजार मुआवजा, 4 हजार मुकदमे का खर्च
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मामले में आयोग ने 7 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया। इसके मुताबिक जियो को अभिनय पांडेय को 10 हजार रुपए मुआवजा और 4 हजार रुपए मुकदमे में हुए खर्च के रूप में देने होंगे। इस तरह कंपनी को कुल 14 हजार रुपए का भुगतान करना होगा।आयोग ने रकम चुकाने के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 10 हजार रुपए के मुआवजे पर 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।