रूस में बढ़ा ईंधन संकट
रूस. Fuel crisis deepens in Russia: Long queues at petrol pumps, rationing begins in several areas. दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देशों में शामिल रूस इन दिनों घरेलू ईंधन आपूर्ति संकट का सामना कर रहा है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता प्रभावित होने से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रशासन को ईंधन की राशनिंग तक लागू करनी पड़ी है, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र की परेशानियां बढ़ गई हैं।
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रिफाइनरियों पर हमलों का दिखा असर
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कई महीनों से यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने के कारण ईंधन उत्पादन और वितरण प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर देश के विभिन्न क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर देखा जा रहा है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कई वीडियो में पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। कुछ वीडियो में लोग खाली पड़े ईंधन स्टेशनों और बढ़ती कीमतों को लेकर नाराजगी भी व्यक्त कर रहे हैं। इससे आम नागरिकों के बीच अनिश्चितता और चिंता का माहौल बना हुआ है।
प्रशासन ने किए राहत के इंतजाम
साइबेरिया के इरकुत्स्क शहर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पेट्रोल पंपों के आसपास पोर्टेबल शौचालयों की व्यवस्था कराई है ताकि लंबी प्रतीक्षा कर रहे लोगों को असुविधा न हो। यह कदम बताता है कि कई क्षेत्रों में स्थिति सामान्य से अधिक गंभीर बनी हुई है।
सरकार का दावा- जल्द सुधरेगी स्थिति
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया है कि मोटर चालकों और व्यवसायों को अभी भी ईंधन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तथा कई पेट्रोल पंपों पर कतारें बनी हुई हैं। वहीं उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि सरकार आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर करने के लिए लगातार काम कर रही है और जल्द हालात सामान्य होने की उम्मीद है। सरकारी तेल कंपनियां अपने पेट्रोल पंपों पर कीमतों को महंगाई दर के दायरे में रखने का प्रयास कर रही हैं, जबकि निजी पेट्रोल पंपों पर कीमतों में कुछ अंतर देखने को मिल रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस में ईंधन आपूर्ति पर दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि रूस ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए स्थिति पर जल्द नियंत्रण पा लिया जाएगा।