वर्ष 2000 में जारी हुआ था स्थाई वारंट
दुर्ग। आरपीएफ ने 27 वर्ष पुराने अपराध- 15/1999 के PNBW वारंटी दिलीप कुमार उमानारे को सीहोर (मप्र) से गिरफ्तार कर विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
वारंट अभियान में मिली ऐतिहासिक सफलता
रेलवे सुरक्षा बल दुर्ग को वारंट तामील अभियान के दौरान उल्लेखनीय सफलता मिली है। मुन्नवर ख़ुर्शीद, महानिरीक्षक सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, एसईसीआर बिलासपुर द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रायपुर के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के मार्गदर्शन में दुर्ग पोस्ट प्रभारी ने टीम गठित की थी। उद्देश्य वर्षों से फरार आरोपियों को पकड़कर न्यायालय के आदेशों का पालन कराना है।
वर्ष 2000 में जारी हुआ था स्थायी वारंट
विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर द्वारा न्यायालय प्रकरण क्रमांक 943/1999, धारा 160(बी) रेल अधिनियम में आरोपी दिलीप कुमार उमानारे (47) निवासी बैरागढ़, भोपाल के विरुद्ध 2 दिसंबर 2000 को स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। आरोपी पिछले 26 वर्षों से लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस की पकड़ से दूर था, जिसे PNBW श्रेणी में दर्ज किया गया था।
पिता से मिली सूचना बनी गिरफ्तारी का आधार
5 जनवरी को पोस्ट प्रभारी संजीव कुमार सिन्हा के निर्देशन में सउनि निरंजन, आरक्षक बी राजौरिया, एसआर मीणा और अवनीश की टीम भोपाल पहुँची। दिए गए पते पर आरोपी के पिता से संपर्क करने पर उसके सीहोर स्थित अवनी ढाबा में कार्यरत होने की जानकारी मिली। टीम तत्काल सीहोर रवाना हुई, जहाँ आरोपी मिल गया।
आरोपी ने स्वीकार की पहचान
ढाबा के पास वारंट दिखाए जाने पर उसने वारंट में दर्ज नाम-पता स्वयं का होना स्वीकार किया। विधिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए उसे गिरफ्तार कर परिजनों को सूचना दी गई। इस पूरी कार्यवाही में वारंटी के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं किया गया।
न्यायालय में पेशी, जेल रवाना
6 जनवरी को RPF दुर्ग ने आरोपी को मूल वारंट सहित रायपुर न्यायालय के समक्ष पेश किया। माननीय विशेष रेलवे न्यायालय ने अग्रिम कानूनी कार्यवाही पूर्ण करते हुए आरोपी को जेल दाखिल भेज दिया। अधिकारियों ने इसे कानून के प्रति प्रतिबद्धता और टीम वर्क की जीत बताया है।